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जब हर सेकंड था कीमती, सरपंच ने दिखाई फुर्ती और बच गई एसडीएम की जान, मिला राह-वीर सम्मान

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श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :-  सड़क दुर्घटनाओं के बाद अक्सर लोग मदद करने के बजाय मूकदर्शक बने रहते हैं, लेकिन ग्राम पठारी के सरपंच गोविंद प्रसाद गौतम ने मानवीय संवेदनशीलता और तत्परता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने एक अधिकारी की जान बचा ली। उनके इसी सराहनीय कार्य के लिए उन्हें प्रदेश के प्रतिष्ठित राह-वीर सम्मान से सम्मानित किया गया है।

करीब सात माह पूर्व, 16 नवंबर 2025 को हुए एक सड़क हादसे में एसडीएम अंबिकेश प्रताप सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि हर गुजरता पल उनकी जिंदगी के लिए चुनौती बनता जा रहा था। ऐसे कठिन समय में सरपंच गोविंद प्रसाद गौतम ने बिना किसी हिचकिचाहट के सहायता के लिए आगे कदम बढ़ाया।
घटना की जानकारी मिलते ही वे तत्काल मौके पर पहुंचे और घायल अधिकारी को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। उनकी त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ के कारण एसडीएम को समय रहते चिकित्सा सुविधा मिल सकी, जो बाद में जीवनरक्षक साबित हुई।
 

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा, जिसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है, सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान उपचार मिलने पर गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। सरपंच की संवेदनशीलता और सक्रियता के कारण एसडीएम को समय पर उपचार मिला और उनकी जान बचाई जा सकी।

इस उल्लेखनीय कार्य को देखते हुए मध्यप्रदेश के परिवहन आयुक्त ने सरपंच गोविंद प्रसाद गौतम को राह-वीर सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया। जिला मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में कलेक्टर राखी सहाय ने उन्हें प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही राह-वीर योजना के तहत 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी स्वीकृत की गई।

कलेक्टर राखी सहाय ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों की मदद करना केवल सामाजिक दायित्व ही नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक ऐसी संवेदनशीलता दिखाए, तो अनेक अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

सम्मान प्राप्त करने के बाद सरपंच गोविंद प्रसाद गौतम ने कहा कि उन्होंने केवल अपना मानवीय कर्तव्य निभाया है। उनके अनुसार किसी की जान बचाने से बड़ा कोई पुरस्कार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समाज को यह संदेश देता है कि अच्छे कार्यों की पहचान और प्रोत्साहन दोनों मिलते हैं।

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Author: Shreya News

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