श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोलः संभागीय मुख्यालय से लगे ग्राम धुरवार-नवलपुर में सोन नदी पर 28 करोड़ की लागत से बनने वाला बैराज अफसरशाही की खींचतान में उलझ गया है। खनिज प्रतिष्ठान मद से मंजूर इस प्रोजेक्ट का टेंडर और प्रशासकीय स्वीकृति पूरी होने के बावजूद नगर पालिका एक ईंट भी नहीं रख पाई है विवाद की शुरुआत नई सीएमओ के पदभार ग्रहण करने के बाद हुई।
आरोप है कि सीएमओ ने चार्ज लेते ही चयनितं ठेकेदार से बात की। सहमति न बनने पर उन्होंने परिषद व कलेक्टर को बायपास कर सीधे नगरीय प्रशासन विभाग को पत्र भेज दिया और टेंडर निरस्त कराने की पहल की। कुछ दिनों बाद ठेकेदार और सीएमओ के बीच ‘बात बन गई’। अब वही सीएमओ कलेक्टर के माध्यम से परिषद अध्यक्ष पर दबाव बना रही हैं कि पुराने टेंडर को ही हरी झंडी दी जाए। यानी पहले जिस टेंडर को नियम विरुद्ध बताकर रद्द कराया, अब उसी पर काम कराने की जिद है। इस दोहरे रवैये से प्रभारी मंत्री समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि खफा हैं। उनका कहना है कि सीएमओ की कार्यप्रणाली पारदर्शी नहीं है।
इसलिए पूरा टेंडर नए सिरे से होना चाहिए। प्रभारी मंत्री इस मामले में जल्द दखल दे सकते हैं। यह बैराज शहर की वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था की रीढ़ है। सरफा डैम के फेल होने पर सोन नदी का यही बैराज पानी देगा। परिषद ने लंबे प्रयासों के बाद इसकी मंजूरी कराई थी। ‘निर्माण में देरी से न सिर्फ लागत बढ़ेगी, बल्कि कभी शहर को पानी के लिए तरसना पड़ सकता है। परिषद जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों का कहना है कि सीएमओ को परिषद की सहमति के बिना टेंडर निरस्ती का पत्र भेजने का अधिकार नहीं है। पहले । निरस्ती, फिर उसी ठेकेदार पर जोर देना
बैराज निर्माण का टेंडर मेरे आने से पहले हो चुका था। मैने इसके लिए पत्राचार किया है, लेकिन अभी भोपाल स्तर से ही प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण निर्माण में देरी हो रही है। जो निर्माण कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, वे सभी कराए जाएंगे, लेकिन सभी काम नियमों के अनुसार ही कराए जाएंगे। सभी को यह भी समझना होगा कि प्रक्रिया में समय लगता है
प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों में नाराजगी है कि कमीशन के खेल में 28 करोड़ का प्रोजेक्ट अटका है।







