श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोलः जिले के जंगलों में हाथियों की दस्तक बढ़ने के कारण तेंदूपत्ता संग्राहकों पर खतरा बढ़ गया है। इस खतरे से सतर्क करने के लिए पहली बार उत्तर वन मंडल अतर्गत आने वाले सभी 450 गांवों में संग्रहण शुरू होने से पहले सतर्कता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। यह पाठ वन कर्मी गांवों में जाकर लोगों से मिलकर पढ़ा रहे हैं। साथ ही गीत और पंपलेट के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। इस समय गावों में उत्तर वन मंडल की यही पुकार, सावधानी से होगी जीवन की जय-जयकार गीत गूंज रहे हैं।
गीत के पध्यम संग्राहकों को यह भी बताया जा रहा है कि किस तरह के पत्ते तोड़ना है, उनकी गड्डियां कैसे बनानी है और किस समय पत्ता तोड़ने जाना है। सीख दी जा रही है कि समूह में जंगल में जाकर पत्ता तोड़ना है और हाथी व भालू जैसे जानवरों की आहट को समझना है।
पांच मई से तेंदूपत्ता संग्रण का काम शुरू होगा। इसके पहले एक-एक गांव में वन कर्मी सतर्कता का पाठ पढ़ाएंगे। संग्राहकों को उनके हित के योजनाओं के बारे में भी बताया जा रहा है, ताकि उसका लाभ ले सकें। यह नवाचार डीएफओ ने पहली बार किया, जिसकी चर्चा विभाग में खूब हो रही है।
उत्तर वन मंडल की डीएफओ तरुणा वर्मा ने बताया कि अपने क्षेत्र ब्यौहारी और जयसिंहनगर सभी 450 गांवो में जागरुकता अभियान शुरू कराया है। इसका उद्देश्य है कि तेंदूपत्ता संग्राहक सुरक्षित रहें और उन्हें विभाग की योजनाओं का पूरा लाभ मिले। उनकी मेहनत बेकार न होने पाए। अभी वे चाहे जैसा पत्ती तोड़कर ले आते है, जो रिजेक्ट हो जाता है और उन्हें कुछ नहीं मिलता है साथ क्षेत्र में जंगली हाथियों का आना-जाना लगा है, तो कैसे सुरक्षित तरीके से उन्हें जंगल से पत्ता लाना है।
इस बारे में समझाया जा रहा है। इसके वन कर्मी गांव-जाकर गीत और पंपलेट के माध्यम से लोगों को. जागरुक कर रहे है। उम्मीद है। की पांच मई से तेंदूपत्ता संग्रहण काम शुरू होगा। इसके पहले सभी गांवों में वन विभाग की टीम जागरुक कर देंगी। इसके लिए कोई विभागीय निर्देश नहीं है। हमने अपने स्तर से शुरू किया है, जिसके सार्थक परिणाम सामने आएंगे।











