श्रेया न्यूज़ शहडोल द्रोपती धुर्वे :- जबलपुर। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप पीने से हुई 24 बच्चों की मौत के बाद अब जबलपुर में भी लापरवाही का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों को दी जाने वाली पैरासिटामाल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आइपी 125एमजी-5एमएल का एक बैच सरकारी गुणवत्ता परीक्षण में अमानक पाया है। गुरुवार को विभाग ने इसके उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी है।
यह सीरप शासकीय रानी दुर्गावती अस्पताल सहित अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में 2024 से वितरित की जा रही थी। अब जाकर रिपोर्ट आई। लापरवाही इतनी कि अब तक 14 हजार 900 बच्चों को जीवनरक्षक समझकर 10 हजार से ज्यादा शीशियां दवा पिलाई जा चुकी हैं।
इस लापरवाही से स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। महत्वपूर्ण है कि नवजात से लेकर 12 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को बुखार होने की स्थिति में यह सिरप दी गई।
रिपोर्ट पिछले माह आई, रोक अब लगी, पूर्व सीएमएचओ पर शक की सुई
भोपाल स्थित ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी ने इस दवा के नमूनों की जांच मार्च 2025 की थी। इस दौरान तत्कालीन सीएमएचओ डा. संजय मिश्रा के पास जिले का चार्ज था। हालांकि व तीन अप्रैल को वित्तीय अनियमितता के मामले में निलंबित किए जा चुके हैं।
प्रभारी सीएमएचओ डा. नवीन कोठारी ने गुरुवार को जारी आदेश में इस दवा के उपयोग पर तत्काल रोक लगाते हुए स्टाक होने पर वापसी के निर्देश जारी किए। यह दवा सरकारी एजेंसी के माध्यम से सप्लाई की गई थी। मामले सामने आने के बाद अब के राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन निर्माता कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है। दवा का निर्माण इंदौर की कंपनी क्वेस्ट लेबोरेट्री प्राइवेट लिमिटेड ने किया है। फैक्ट्री पीथमपुर जिला धार में स्थित है।











