श्रेया न्यूज़ शहडोल द्रोपती धुर्वे :- शहडोल जिले के जिला चिकित्सालय स्थित एसएनसीयू में डॉक्टरों की मेहनत और सतत देखरेख से मात्र 790 ग्राम वजन वाले अति कमजोर और समय से पूर्व जन्मे नवजात शिशु को नई जिंदगी मिली है। करीब 70 दिन तक चले उपचार के बाद नवजात को स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जिससे परिजनों और अस्पताल स्टाफ में खुशी का माहौल है।
जानकारी के अनुसार ग्राम धोलको कोठार, तहसील ब्यौहारी निवासी रोशनी यादव पति अखिलेश यादव की अचानक घर पर ही समय से पहले डिलीवरी हो गई। नवजात का जन्म मात्र लगभग 6 माह में ही हो गया था और उसका वजन सिर्फ 790 ग्राम था। शिशु अत्यंत कमजोर और गंभीर स्थिति में था। परिजन उसे तत्काल ब्यौहारी सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला चिकित्सालय शहडोल के एसएनसीयू में रेफर कर दिया।
बीच में बच्चे की स्थिति दोबारा सेप्टीसीमिया के कारण बिगड़ गई, जिसके बाद हायर एंटीबायोटिक और दो बार अतिरिक्त खून चढ़ाना पड़ा। धीरे-धीरे सुधार होने पर मां का दूध दो-दो एमएल देकर ट्रायल शुरू किया गया और कंगारू मदर केयर (KMC) भी शुरू की गई। शिशु 35 दिनों तक सीपीएपी सपोर्ट पर रहा और बाद में 17 दिन ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। पीलिया होने पर दो दिन फोटोथेरेपी भी दी गई।
धीरे-धीरे दूध की मात्रा बढ़ाई गई और चम्मच-कटोरी से दूध पिलाना शुरू किया गया। कंगारू मदर केयर से बच्चे का वजन प्रतिदिन 10 से 15 ग्राम बढ़ने लगा। लगातार वजन बढ़ने और सभी जांच सामान्य आने के बाद 70 दिन बाद नवजात को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
एसएनसीयू के इंचार्ज शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील हथगेल ने बताया कि 7 माह से पहले जन्मे बच्चों को बचाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उनके फेफड़े, हृदय, मस्तिष्क और किडनी पूरी तरह विकसित नहीं होते। ऐसे बच्चों में ब्रेन हेमरेज, संक्रमण और सांस रुकने का खतरा ज्यादा रहता है। उन्होंने बताया कि एसएनसीयू की पूरी टीम, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत से इस बच्चे को बचाया जा सका, जो जिला अस्पताल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।







