श्रेया न्यूज़ शहडोल द्रोपती धुर्वे :- शहडोलः जिले में नशे के बढ़ते कारोबार ने अब एक नया रास्ता निकाल लिया है। सड़क मार्ग पर लगातार सख्ती के बाद तस्करों ने ट्रेनों को अपना नया जरिया बना लिया, जिसका उदाहरण सोमवार को सामने आया है, जब जीआरपी ने गांजा तस्करों को पकड़ा तो रेल कर्मचारी ही निकले। जीआरपी पुलिस ने शहडोल रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी कर दो ऐसे तस्करों को रंगे हाथों पकड़ लिया, जो हीराकुंड एक्सप्रेस से जुड़े कर्मचारी ही निकले। यानी रेल कर्मचारी ही नशा का कारोबार में शामिल मिले हैं।
जीआरपी उप निरीक्षक आरएम झरिया ने बताया कि पश्चिम बंगाल निवासी मृणाल कांत महतो और झारखंड निवासी दीपेश महतो शहडोल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2-3 पर एक बैग के साथ ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर जीआरपी की नजर उन पर पड़ी। जैसे ही पुलिस उनके पास पहुंची, दोनों बैग लेकर भागने लगे लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया। तलाशी के दौरान बैग से 10 किलों से अधिक गांजा बरामद किया गया, जिसकी कीमत लगभग 2 लाख रुपये आंकी गई है। यह भी बताया कि गिरफ्तार आरोपित मृणाल कांत महतो हीराकुंड एक्सप्रेस में अटेंडरों का सुपरवाइजर है, जबकि उसका साथी दीपेश महतो उसी ट्रेन में बेडरोल अटेंडर के रूप में कार्यरत है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि दोनों आरोपित अपने पद का फायदा उठाकर ट्रेनों के माध्यम से गांजा तस्करी का नेटवर्क चला रहे थे।
जीआरपी पुलिस अब इस मामले में अन्य संभावित लिंक और गिरोह के सदस्यों की तलाश में जुट गई है। इस कार्रवाई से साफ है कि पुलिस नशे के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चला रही है, लेकिन तस्कर भी नए-नए तरीके अपनाकर कानून को चुनौती दे रहे हैं। रुटिन चेकिंग के दौरान उनको पकड़ कर उनकी तलाशी ली गई तो उनके पास से गांजा मिला। गांजा जब्त कर दोनों को गिरफ्तार किया गया है।







