श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :- शहडोल जिले की रामपुर बटुरा खदान के प्रभावित किसान मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर फिर आंदोलन पर उतरे।
शहडोल: जिले में कोयला उत्पादन कर रही एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र की अमलाई स्थित रामपुर बटुरा खदान के लिए अपनी भूमि देने वाले किसान अब मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि लिखित सहमति और आश्वासन मिलने के बावजूद प्रबंधन उनकी मांगों को पूरा नहीं कर रहा है, जिससे उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
आश्वासन पर टला आंदोलन, लेकिन नाराजगी बरकरार
सोमवार को किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। बड़ी संख्या में प्रभावित किसान प्रदर्शन में शामिल हुए और खदान का काम बंद कराने की चेतावनी दी। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया। हालांकि, एसईसीएल प्रबंधन ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर किसानों से बातचीत की और उन्हें आश्वासन देकर फिलहाल आंदोलन समाप्त करवा दिया।
कई गांवों के किसान प्रभावित, लंबित हैं मांगें
रामपुर बटुरा परियोजना से रामपुर, बेलिया, खांडा, बिछिया, अतरिया, खैरवना और कोदैली गांव के किसान प्रभावित हैं। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन अधिग्रहण के बाद भी उन्हें समय पर मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास की सुविधा नहीं मिली है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और वे लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं।
दो साल से लंबित रोजगार और अधूरा पुनर्वास
किसानों ने बताया कि कई रोजगार से जुड़ी फाइलें पिछले दो वर्षों से लंबित हैं। इसके अलावा रामपुर और बेलिया गांव का पूर्ण विस्थापन होना है, लेकिन मकानों के मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया में भी देरी हो रही है। किसानों ने पुनर्वास राशि तीन लाख रुपये से बढ़ाकर छह से सात लाख रुपये करने की मांग भी उठाई है।
दिसंबर 2025 में मिला था लिखित आश्वासन
ग्रामीणों के अनुसार दिसंबर 2025 में भी इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन किया गया था। उस समय जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की मौजूदगी में जल्द समाधान का लिखित आश्वासन दिया गया था। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
अन्य समस्याएं भी बनीं आंदोलन का कारण
किसानों ने बिछिया और अतरिया गांव के लिए भूमि मुआवजा, कोदैली गांव की डीआरआरसी बैठक, सड़क पर लाइट लगाने और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने जैसी मांगें भी उठाईं। इन मुद्दों पर भी अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
फिर आंदोलन की चेतावनी
सोमवार को प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रबंधन के साथ चर्चा के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया। हालांकि किसानों ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे फिर से बड़ा आंदोलन करेंगे और खदान का काम बंद कराने से भी पीछे नहीं हटेंगे।







