श्रेया न्यूज़ द्रोपती धुर्वे शहडोल :- शहडोलः जिले के बच्चे ने गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) जैसी गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारी को मात देकर नई जिंदगी की जंग जीती। उसके परिवार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, जब बच्चे को अचानक हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस होने लगी। महज दो दिनों में हालत इतनी बिगड़ गई कि वह खड़ा होने और चलने में असमर्थ हो गया। स्वजन ने तत्काल उसे बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, शहडोल में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार शुरू किया गया। अस्पताल में भर्ती के समय बच्चे की स्थिति चिंताजनक थी। उसकी मांसपेशियों की ताकत तेजी से घट रही थी। विशेषज्ञों की जांच में पुष्टि हुई कि’ वह गिलियन-बैरे सिंड्रोम से पीड़ित है,
एक ऐसी बीमारी जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करती है, जिससे तेजी से बढ़ती कमजोरी और गंभीर मामलों में सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है। मेडिकल कालेज में न्यूरोफिजियोलाजी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कंसल्टेंट डा. मितेश सिन्हा ने नर्व कंडक्शन वेलोसिटी (एनसीवी) परीक्षण से बीमारी का सटीक निदान किया। इलाज के शुरुआती दिनों में बच्चे की हालत और बिगड़ गई। कमजोरी इतनी बढ़ गई कि वेंटिलेटर की आवश्यकता की आशंका बनने लगी। यह समय परिवार और चिकित्सकीय टीम दोनों के लिए बेहद समय पर दी गई कठिन हालांकि दिनों में स्थिति स्थिर हुई और धीरे-धीरे उपचार का असर दिखने लगा। कुछ ही सुधार शुरू हुआ। लगभग 15 दिन तक आइसीयू में रखने के बाद बच्चे को सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया गया। अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट सका।, समय पर उपचार से गिलियन-बैरे सिंड्रोम पूरी तरह ठीक हो सकता है।







