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मध्य प्रदेश में 33 दिनों में 11 बाघों की मौत, टाइगर स्टेट में करंट व आपसी संघर्ष इसकी सबसे बड़ी वजह

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श्रेया न्यूज़ शहडोल द्रोपती धुर्वे :-     मध्य प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा बाघों की संख्या होने की वजह से इसे टाइगर स्टेट कहा जाता है। पिछले कुछ दिनों में यहां लगातार हो रही बाघों की मौत ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 33 दिनों में अलग-अलग कारणों से 11 बाघों की मौत ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

उमरिया। टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में बाघों की मौत के आंकड़े चिंताजनक हैं। इस साल के शुरुआती 33 दिनों में 11 बाघों की मौत हुई। पिछले वर्ष प्रदेश में 55 बाघों की मौत हुई थी। इनमें अधिकांश बाघों की मौत अभयारण्य के आसपास खेतों में करंट फैलाने या आपसी संघर्ष में हो रही है। सोमवार को एक साथ दो बाघों की मौत हुई। शहडोल जिले के जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र स्थित मसिरा सर्किल में एक बाघ और एक बाघिन के शव पाए गए। दोनों शव 200 मीटर के अंतरात में मिले। इसमें बाघिन की मौत करंट लगने से होने की बात सामने आई है जबकि बाघ की मौत को आपसी संघर्ष बताया जा रहा है। जहां बाघ बाघिन के शव पाए गए हैं, वहां पास में ही खेत में लगी फसल को जानवरों से बचाने के लिए करंट फैलाया गया था।

वन विभाग का खुफिया तंत्र हुआ फेल

मध्य प्रदेश में 33 दिनों में बाघों की मौत की सर्वाधिक घटना शहडोल वन वृत्त में हुई है। यहां छह बाघ मारे जा चुके हैं। इनमें चार बाघ बांधवगढ़ और दो बाघ उत्तर वन मंडल के जयसिंहनगर रेंज की वनचाचर बीट में मारे गए। जानकारों का कहना है कि जंगल के आसपास बसे गांवों में करंट फैलाने की घटनाओं पर सिर्फ इसलिए रोक नहीं लग पा रही है, क्योंकि वन विभाग का खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल हो चुका है।

ईको विकास समितियों की संख्या 1050 के आसपास

ऐसे मामलों पर नजर रखने के लिए समितियां बनाई गई हैं। अलग-अलग रिपोर्ट के अनुसार मप्र में ईको विकास समितियों की संख्या 1050 के आसपास है। ईको विकास समितियों के अलावा, राज्य में 9784 ग्राम वन समितियां और 4773 वन सुरक्षा समितियां भी सक्रिय हैं। इन सभी को मिलाकर कुल 15 हजार, 600 से अधिक वन समितियां हैं। यह समितियां राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्यों के आसपास के क्षेत्रों में वन और वन्यजीवों के संरक्षण को सुनिश्चित करने और स्थानीय समुदायों के विकास के लिए बनाई गई हैं, लेकिन इनका कोई लाभ वन विभाग को नहीं मिल रहा है।

Shreya News
Author: Shreya News

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