श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- जिले के करकेली विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरहा में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक के बाद एक करीब 20 विद्यार्थियों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों को बुखार, उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी। स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और अभिभावकों में भी चिंता फैल गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एहतियातन गांव में भी जांच शुरू कर दी है, ताकि बीमारी के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। पानी के स्रोत, आसपास का वातावरण और अन्य संभावित कारणों की जांच की जा रही है। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी पूरे मामले पर नजर रखने की बात तो कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय करने को लेकर अब तक कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब जिला शिक्षा अधिकारी आर.एस. मरावी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। यह चुप्पी कई सवालों को जन्म देती है। बच्चों की सेहत से जुड़ा मामला होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी का सामने न आना, शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
यह घटना सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या हर घटना के बाद जांच और आश्वासन देकर विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचता रहेगा?
जरहा स्कूल की यह घटना शिक्षा विभाग के लिए चेतावनी है। अब जरूरत है केवल हालात सामान्य बताने की नहीं, बल्कि सख्त जांच, जिम्मेदारों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाने की। बच्चों की सेहत के साथ किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।









