श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :- रसमोहनी | गोहपारू वन परिक्षेत्र अंतर्गत अटरिया गांव में भालू के हमले से एक वृद्ध की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आ रही है।नदी किनारे गई जान जानकारी के अनुसार, वृद्ध आज दोपहर गाय चराने के लिए नदी किनारे गए थे। तभी जंगल की ओर से अचानक आए भालू ने उन पर हमला कर दिया। हमले में वृद्ध गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही गोहपारू वन परिक्षेत्र के अधिकारी और बाद में डीएफओ भी घटनास्थल पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है और क्षेत्र में अलर्ट जारी किया गया।
पहले से चेतावनी थी, फिर भी क्यों गई जान? इस पूरी घटना में सबसे बड़ा सवाल यही है कि —जब पिछले कई महीनों से अखबारों और समाचार माध्यमों में लगातार खबरें प्रकाशित हो रही थीं कि इस क्षेत्र में जंगली भालू की गतिविधियां बढ़ गई हैं,
जब विभाग द्वारा समय-समय पर कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई जाती रही,तो फिर एक निर्दोष वृद्ध की जान कैसे चली गई? ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि —ड्यूटी केवल कागज़ों में लगाई गई,ज़मीनी स्तर पर नियमित गश्त नहीं हुई,न ही ग्रामीणों को समय रहते सतर्क करने के ठोस प्रयास किए गए।
अगर सचमुच निगरानी प्रभावी होती,तो शायद आज यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। ग्रामीणों में आक्रोश,
जवाबदेही की मांग
*घटना के बाद अटरिया गांव सहित आसपास के इलाकों में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि—
“खतरा पहले से था, खबरें छपती रहीं, फिर भी जिम्मेदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब एक जान चली गई, तब सब हरकत में आए।” ग्रामीणों ने मांग की है कि —जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए,इलाके में स्थायी वन सुरक्षा चौकी बनाई जाए,और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना लागू की जाए।










