SUBSCRIBE NOW

Home » जिला समाचार » MP: धान बेचने के बाद भी खाली हाथ किसान! अनूपपुर में 137 करोड़ का भुगतान क्यों अटका? जानें कहां फंसा है पेंच

MP: धान बेचने के बाद भी खाली हाथ किसान! अनूपपुर में 137 करोड़ का भुगतान क्यों अटका? जानें कहां फंसा है पेंच

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :-      अनूपपुर जिले में धान उपार्जन के बाद भुगतान में देरी से किसान परेशान हैं। परिवहन और भंडारण की समस्या के कारण 137 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है, जिसके समाधान के लिए प्रशासन ने राइस मिलों का अधिग्रहण किया है।
Due to lack of transportation, farmers are still owed over Rs 100 crore after procurement

अनूपपुर जिले में 1 दिसंबर से 20 जनवरी तक धान उपार्जन का कार्य जारी है, लेकिन भुगतान में हो रही देरी के कारण किसान परेशान हैं। जिले में बनाए गए 34 उपार्जन केंद्रों पर अब तक 18,212 किसानों ने अपनी उपज का विक्रय किया है, लेकिन फसल बेचने के एक माह बाद भी बड़ी संख्या में किसानों को भुगतान नहीं मिल पाया है। भुगतान में देरी का मुख्य कारण उपार्जन केंद्रों से धान का समय पर परिवहन नहीं होना बताया जा रहा है।

धान खरीदी के बाद नियमानुसार चार दिनों के भीतर भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन परिवहन और भंडारण की समस्या के चलते किसानों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है। नियमों के अनुसार गोदाम तक धान पहुंचने और भंडारण होने के बाद ही ईपीओ जारी कर किसानों के खातों में राशि भेजी जाती है। परिवहन नहीं होने के कारण जिले में 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अब तक लंबित है।

228 करोड़ के मुकाबले सिर्फ 90 करोड़ का भुगतान
जिले के 34 खरीदी केंद्रों पर अब तक 9 लाख 63 हजार 991 मैट्रिक टन धान की खरीदी की गई है, जिसके एवज में किसानों को कुल 228 करोड़ 36 लाख 87 हजार 995 रुपये का भुगतान किया जाना है। इसमें से अब तक 9,615 किसानों को 90 करोड़ 50 लाख 91 हजार 903 रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि 8,597 किसानों को 137 करोड़ 85 लाख 96 हजार 092 रुपये का भुगतान अब भी शेष है। समय पर भुगतान नहीं होने से किसान बार-बार उपार्जन केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

गोदाम फुल, अब राइस मिलों को किया गया अधिग्रहित
खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के पास जिले में कुल 22 गोदाम हैं, जिनकी भंडारण क्षमता लगभग 50 हजार मैट्रिक टन है। ये सभी गोदाम पूरी तरह भर चुके हैं और फिलहाल विभाग के पास अतिरिक्त भंडारण की व्यवस्था नहीं है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने हाल ही में मिलर्स के साथ बैठक कर धान मिलिंग के लिए समन्वय का प्रयास किया था, लेकिन मिलर्स ने पुराने बकाया भुगतान के बाद ही नया कार्य शुरू करने की शर्त रखी, जिससे मिलिंग कार्य प्रारंभ नहीं हो सका।

इसके बाद जिला प्रशासन ने अस्थायी समाधान के तौर पर राइस मिलों को अधिग्रहित कर वहीं धान का भंडारण करने का निर्णय लिया। जिले में कुल 22 मिलर्स हैं, जिनमें से 13 मिलर्स ने अपने गोदामों में धान भंडारण की सहमति दे दी है, जबकि शेष से बातचीत जारी है।

परिवहन की धीमी गति बनी किसानों की परेशानी
अब तक खरीदे गए धान में से 5 लाख 2 हजार 7 मैट्रिक टन का परिवहन गोदामों तक किया जा चुका है, जबकि 4 लाख 72 हजार 811 मैट्रिक टन धान अभी भी उपार्जन केंद्रों पर ही रखा हुआ है। इसके चलते नए किसानों से धान खरीदी के लिए भी जगह की कमी उत्पन्न हो गई है। पहले धान परिवहन की जिम्मेदारी केवल एक ठेकेदार को दी गई थी, लेकिन स्थिति को देखते हुए अब एक अतिरिक्त ठेकेदार को भी लगाया गया है। वर्तमान में प्रतिदिन 65 ट्रकों के माध्यम से धान का परिवहन किया जा रहा है।

अधिकारियों का बयान
इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि अब तक भंडारण की जगह की कमी बनी हुई थी, लेकिन इसके समाधान के लिए 15 राइस मिलों का अधिग्रहण किया गया है। इनमें से 13 मिलर्स से सहमति बन चुकी है और दो से बातचीत जारी है। मिलर्स की हड़ताल समाप्त होने तक राइस मिलों में ही धान का भंडारण किया जाएगा। इसके बाद मिलिंग का कार्य भी आगामी दिनों में शुरू किया जाएगा। परिवहन और भंडारण की समस्या के कारण भुगतान लंबित है, जिसे जल्द ही दूर कर लिया जाएगा।

Shreya News
Author: Shreya News

Leave a Comment

READ MORE

Join Us