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महिला की सुरक्षा को खतरा होते ही पुलिस को मिलेगा अलर्ट, MP में लगेंगे सवा लाख वीडियो AI CCTV कैमरे

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श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :-    मध्य प्रदेश पुलिस महिला सुरक्षा के लिए सेफ सिटी अभियान के तहत सवा लाख वीडियो एनालिटिक्स युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाएगी। ये कैमरे खतरा भांपकर कंट्रोल रूम को अलर्ट करेंगे। पूरे प्रदेश में 65 कंट्रोल रूम बनेंगे, परियोजना पर हजार करोड़ से अधिक खर्च होगा।

भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस आमजन की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसमें ज्यादा ध्यान महिलाओं की सुरक्षा को लेकर रहेगा। इसके लिए ‘सेफ सिटी’ अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी शहरों में संवेदनशील स्थल चिह्नित कर वहां ऐसे सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जो वीडियो एनालिटिक्स तकनीकी से युक्त होंगे। इनके माध्यम से किसी भी सड़क या गली में अकेली जा रही महिला की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी। ये कैमरे महिला को खतरा भांपकर पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट कर देंगे।

दरअसल, ये कैमरे महिला-पुरुष की पहचान करके भी यह बता सकेंगे कि कहीं पुरुषों के बीच में अकेली महिला तो नहीं है। जैसे किसी गर्ल्स कालेज के सामने बहुत से लड़कों के बीच कोई लड़की दिख रही तो संदेश पहुंच जाएगा। पूरे प्रदेश में सवा लाख कैमरे लगाने की कार्ययोजना बनाई गई है।

पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा है। इनके अतिरिक्त रेलवे स्टेशन, डायल 112, पुलिस थानों में लगे कैमरों को भी नियंत्रण कक्षों से जोड़ा जाएगा। इन कैमरों की संख्या 25 हजार से अधिक है। कैमरों से मिलने वाले वीडियो की निगरानी के लिए प्रदेश भर में 65 नियंत्रण कक्ष बनाए जाएंगे। पूरे काम में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे।

पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि अभी सेफ सिटी अभियान के अंतर्गत अभी 12 हजार 400 कैमरे लगे हैं। इनमें इंदौर, रीवा, सिंगरौली और ओंकारेश्वर में सभी काम कर रहे हैं। भोपाल, ग्वालियर औ शहडोल में 90 प्रतिशत ही चालू हालत में हैं। सवा लाख और कैमरों लगने से घटनाओं को रोकने और आरोपितों को पकड़ने में बहुत सहायता मिलेगी।

इसलिए हुई देरी

सबसे पहले पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश में सवा लाख कैमरे लगाने का प्रस्ताव भेजा। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग इस काम के लिए तैयार हो गया। विभाग के अधिकारियों का तर्क था कि पहले से ही इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) के अंतर्गत कैमरे से लगातार ट्रैफिक की निगरानी और चालानी कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद मध्य प्रदेश इलेक्ट्रानिक डेवलपमेंट कारपोरेशन भी आगे आ गया। पुलिस पहले से यह काम कर रही है। सुरक्षा की प्रारंभिक जिम्मेदारी भी उस पर है, इसलिए पुलिस से ही यह काम कराने के लिए लगभग सहमति बन चुकी है।

इन स्थितियों में मिलेगा अलर्ट
  • वीडियो एनालिटिक्स से संदिग्ध गतिविधियों की आशंका के संकेत मिल जाएगा।
  • ब्रिज या अन्य जगह जहां लोग कूदकर खुदकुशी करते हैं उन स्थानों को संवेदनशील मानकर कैमरे लगाए जाएंगे। ऐसी जगह किसी व्यक्ति के रहने पर अलर्ट आएगा। इसी तरह से कूदने पर भी सिस्टम अलर्ट देगा।
  • किसी घटना के बाद पुलिस नहीं पहुंचती तो लगातार अलर्ट मिलता रहेगा।
  • घटना स्थल पर कैमरे लगे होने की स्थिति में वाहनों के भिड़ने या पलटने पर भी अलर्ट मिलेगा।
  • इन कैमरों से यह निगरानी भी हो सकेगी पुलिस का मूवमेंट निर्धारित गतिविधि के अनुसार हो रहा है या नहीं।
  • तेज गति से या नियम विरुद्ध चलने वाले वाहनों को भी पकड़ा जा सकेगा।
लखनऊ में एआइ कैमरे करते हैं अलर्ट

कुछ ऐसा ही प्रयोग देश के उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लागू है। वहां उत्तर प्रदेश पुलिस एआइ कैमरे लगा चुकी हैं। ये कैमरे खतरे को भांप लेते हैं। उदाहरण के तौर कार में बैठा कोई व्यक्ति बाहर हाथ निकालकर मदद की गुहार लगा रहा है तो पुलिस को अलर्ट मिल जाएगा। बता दें कि दिल्ली में निर्भया कांड के बाद सभी राज्यों का महिला सुरक्षा पर फोकस बढ़ा है।

Shreya News
Author: Shreya News

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