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रायपुर में एक ही गोत्र में शादी की मिली मिली थी ‘सजा’, 2 साल तक घुट-घुट कर जीने को मजबूर था परिवार, ऐसे मिला सम्मान

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    श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :-      कोंडागांव की एक आदिवासी महिला और उसके पति को एक ही गोत्र में विवाह करने पर सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ा। समाज ने दंपती पर अलग रहने का दबाव बनाया, गांव से निकालने की धमकी दी और सामाजिक बहिष्कार कर दिया। दो वर्षों तक दंपती अपमान, डर और तिरस्कार के बीच जीवन जीने को मजबूर रहा। महिला ने बताया कि बहिष्कार के बाद उनसे बातचीत बंद कर दी गई।

रायपुर। कोंडागांव की एक आदिवासी महिला और उसके पति को एक ही गोत्र में विवाह करने पर सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ा। समाज ने दंपती पर अलग रहने का दबाव बनाया, गांव से निकालने की धमकी दी और सामाजिक बहिष्कार कर दिया। दो वर्षों तक दंपती अपमान, डर और तिरस्कार के बीच जीवन जीने को मजबूर रहा। महिला ने बताया कि बहिष्कार के बाद उनसे बातचीत बंद कर दी गई, त्योहारों और सामाजिक कार्यक्रमों में प्रवेश रोक दिया गया। बच्चों को स्कूल में ताने सुनने पड़े और राशन लाने तक में परेशानी हुई। गांव में रहते हुए भी दोनों को अलग-थलग कर दिया गया। समाज के लोगों ने स्पष्ट कह दिया था कि या तो अलग रहो या गांव छोड़ दो।

राज्य महिला आयोग का दखल

मामला राज्य महिला आयोग तक पहुंचने के बाद दंपती को राहत मिली। आयोग के निर्देश पर सुनवाई के दौरान अनावेदकगणों ने आवेदिका को 60 हजार रुपये लौटाए। पति ने साथ रहने की सहमति दी। सभी ने विवाह में बाधा न डालने और सामाजिक बहिष्कार न करने का आश्वासन दिया। उल्लंघन की स्थिति में एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार रहेगा।

कार्यालय समय के बाद बैठने का दबाव

एक अन्य प्रकरण में आरोपित अनावेदक द्वारा कार्यस्थल पर प्रताड़ना, व्हाट्सएप संदेशों के जरिए निजी जीवन में दखल और कार्यालय समय के बाद बैठने के दबाव की शिकायत पर राज्य महिला आयोग ने कलेक्टर कोंडागांव से जांच प्रतिवेदन की प्रमाणित प्रति तलब की है। आयोग ने उभय पक्षों को अगली सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिए। आवेदिका के अनुसार आरोपित द्वारा व्हाट्सएप पर कारण बताओ पत्र भेजकर और लगातार संदेश कर परेशान किया गया। संलग्न चैट रिपोर्ट से निजी जीवन में हस्तक्षेप की पुष्टि होने पर आयोग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करने की बात कही।

नर्स की शिकायत पर मांगी माफी

एक अन्य मामले में शासकीय अस्पताल भाटापारा में नर्स के रूप में कार्यरत आवेदिका से ड्यूटी हैंडओवर के मुद्दे पर दुर्व्यवहार की शिकायत पर आयोग ने कड़ी समझाइश दी। आरोपित ने भविष्य में शिकायत या उत्पीड़न न करने की लिखित स्वीकृति दी। आयोग ने पुनरावृत्ति होने पर एफआईआर दर्ज कराए जाने की जानकारी दी और इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।

15 लाख रुपये भरण-पोषण

तीसरे प्रकरण में दहेज के लिए प्रताड़ना की शिकायत पर उभय पक्षों को सुना गया। सहमति से सुलहनामा के आधार पर तलाक के एवज में आवेदिका को एकमुश्त 15 लाख रुपये भरण-पोषण देने पर सहमति बनी। आयोग ने सहमति दर्ज कर मामले के निराकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

Shreya News
Author: Shreya News

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