श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :- MP News: नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में ट्रायल कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा से दंडित होने के विरुद्ध हुई एक अपील की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के आर्टिकल 142 के अधिकार का उपयोग सर्वोच्च न्यायालय के पास है। हाई कोर्ट के पास यह अधिकार उपलब्ध नहीं है।
जबलपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में ट्रायल कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा से दंडित होने के विरुद्ध हुई एक अपील की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति राम कुमार चौबे की युगलपीठ ने कहा कि भारत के संविधान के आर्टिकल 142 के अधिकार का उपयोग सर्वोच्च न्यायालय के पास है। हाई कोर्ट के पास यह अधिकार उपलब्ध नहीं है।
POCSO एक्ट में सुनाई गई सजा को बरकरार रखा
कोर्ट ने POCSO एक्ट में सुनाई गई सजा को बरकरार रखा। इटारसी निवासी साजन भट्ट की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि नाबालिग पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने उसके खिलाफ POCSO व दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था।
प्रकरण में जमानत मिलने के बाद उसने पीड़ित से शादी कर ली है और उनका एक बच्चा भी है। पीड़ित ने अपने बयान में कहा है कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से स्थापित हुए थे।
इसके बावजूद न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। बच्चे की देखभाल पीड़ित कर रही है और दोनों का देखरेख करने वाला कोई नही है। पीड़िता को उसके परिवार ने छोड़ दिया है।
नाबालिग की श्रेणी में आती थी पीड़िता
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 साल थी। POCSO एक्ट की परिभाषा के अनुसार वह नाबालिग की श्रेणी में आती थी। नाबालिग होने के कारण उसकी सहमति कोई मायने नहीं रखती है।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा था कि अपीलकर्ता ने उसके साथ कई बार पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असाल्ट किया है। ट्रायल कोर्ट ने सजा से दंडित करने में कोई गलती नहीं की है।
हाई कोर्ट के पास यह अधिकार उपलब्ध नहीं
अपीलकर्ता ने किशोरों की प्राइवेसी के अधिकार के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित तीन आदेशों का उल्लेख किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इन मामलों में भारत के संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए नरमी दिखाई है। हाई कोर्ट के पास यह अधिकार उपलब्ध नहीं है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका को निरस्त कर दिया।







