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चॉल में बीता बचपन, 15 साल में टूटा दुखों का पहाड़; आज हजारों करोड़ की कंपनी के मालिक, अदाणी-बिड़ला को दे रहे टक्कर

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        श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :-       कहा जाता है कि मुश्किलें इंसान को तोड़ने नहीं, बल्कि उसे मजबूत बनाने आती हैं। कुछ लोग हालात के सामने हार मान लेते हैं, तो कुछ संघर्ष को ही अपनी ताकत बना लेते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है वायर और केबल सेक्टर की दिग्गज कंपनी पॉलीकैब के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर इंदर जयसिंघानी की, जिन्होंने बेहद गरीबी से उठकर कारोबार की दुनिया में बड़ी पहचान बनाई।

बिजनेस डेस्क। कहा जाता है कि मुश्किलें इंसान को तोड़ने नहीं, बल्कि उसे मजबूत बनाने आती हैं। कुछ लोग हालात के सामने हार मान लेते हैं, तो कुछ संघर्ष को ही अपनी ताकत बना लेते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है वायर और केबल सेक्टर की दिग्गज कंपनी पॉलीकैब के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर इंदर जयसिंघानी की, जिन्होंने बेहद गरीबी से उठकर कारोबार की दुनिया में बड़ी पहचान बनाई।

आज इंदर जयसिंघानी भारत की सबसे बड़ी वायर और केबल कंपनी के एमडी हैं, लेकिन उनका शुरुआती जीवन बेहद कठिनाइयों भरा रहा। महज 15 साल की उम्र में उनके सिर से पिता का साया उठ गया। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा झटका था। पिता के निधन के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए Sind Electric Stores का काम संभाल लिया। यहीं से उनके संघर्ष और सफलता की कहानी ने रफ्तार पकड़ी।

चॉल में बीता बचपन

मुंबई के लोहार चॉल में जन्मे इंदर जयसिंघानी का बचपन अभावों में बीता। पिता की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए, जिससे उन्हें कम उम्र में ही परिवार का सहारा बनना पड़ा। हालांकि, उन्होंने हालात से हार मानने के बजाय खुद को आगे बढ़ाने का फैसला किया और पारिवारिक बिजनेस को नई दिशा देने में जुट गए।

छोटी दुकान से बड़ी कंपनी तक

शुरुआत में लोहार चॉल की एक छोटी सी इलेक्ट्रिक दुकान से जुड़े इंदर जयसिंघानी ने अपने बिजनेस विजन से पॉलीकैब को देश की अग्रणी वायर और केबल कंपनी बना दिया। साल 1975 में उन्होंने अपने भाइयों के साथ MIDC अंधेरी में ठाकुर इंडस्ट्रीज नाम से केबल और तार बनाने की फैक्ट्री की नींव रखी।

1983 में पॉलीकैब इंडस्ट्रीज को गुजरात सरकार ने लघु उद्योग के रूप में रजिस्टर किया। इसके बाद 1996 में कंपनी को पॉलीकैब वायर्स प्राइवेट लिमिटेड के रूप में शामिल किया गया। 1998 में दमन में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू हुई, जहां पावर केबल, हाउस वायर, टेलीफोन और ऑप्टिकल फाइबर केबल का उत्पादन शुरू हुआ।

लगातार बढ़ता कारोबार

2006 में पॉलीकैब ने ₹10,000 मिलियन का रेवेन्यू पार किया और 2011 तक यह आंकड़ा ₹31,000 मिलियन तक पहुंच गया। 2013 में कंपनी ने स्विच सेगमेंट में एंट्री की, जिससे FMEG सेक्टर में भी उसकी मौजूदगी मजबूत हुई। इसके बाद फैन, LED लाइटिंग और MCB जैसे प्रोडक्ट्स के जरिए कंपनी ने अपना दायरा और बढ़ाया।

कितनी है इंदर जयसिंघानी की नेटवर्थ?

2019 में पॉलीकैब को शेयर बाजार में लिस्ट किया गया। कंपनी का IPO 52 गुना सब्सक्राइब हुआ। ब्लूमबर्ग इंडेक्स के अनुसार, इस समय इंदर जयसिंघानी की नेटवर्थ करीब 7.96 बिलियन डॉलर है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 707661065000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

अदाणी और बिड़ला से सीधी टक्कर

अब पॉलीकैब को बड़े कॉर्पोरेट ग्रुप्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। गौतम अदाणी के नेतृत्व वाले अडानी ग्रुप ने 2025 में वायर्स और केबल बिजनेस में एंट्री की है। वहीं आदित्य बिड़ला ग्रुप ने भी अल्ट्राटेक सीमेंट के जरिए इस सेक्टर में कदम रखते हुए गुजरात में नया प्लांट लगाने का ऐलान किया है। ऐसे में इंदर जयसिंघानी की अगुवाई में पॉलीकैब को दिग्गजों से सीधी चुनौती मिल रही है।

Shreya News
Author: Shreya News

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