SUBSCRIBE NOW

Home » राज्य » पसीने से चार्ज होगी डिजिटल घड़ी और हियरिंग डिवाइस, आईआईटी इंदौर में तैयार हुई डिवाइस

पसीने से चार्ज होगी डिजिटल घड़ी और हियरिंग डिवाइस, आईआईटी इंदौर में तैयार हुई डिवाइस

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

 श्रेया न्यूज़ सीमा सिंह शहडोल :- आईआईटी इंदौर के शोधकर्ताओं ने एक अनोखी तकनीक विकसित की है, जिससे पसीने से बिजली पैदा की जा सकती है। इस तकनीक का उपयोग छोटे इलेक्ट्रिक उपकरणों को चार्ज करने में किया जा सकता है, जैसे कि डिजिटल घड़ी और हियरिंग डिवाइस। यह तकनीक मेडिकल उपकरणों और वियरेबल डिवाइसेज के लिए एक नए युग की शुरुआत कर सकती है।

 इंदौर। सौर ऊर्जा के अलावा ग्रीन इनर्जी के रूप में हवा व पानी का उपयोग करके बिजली तैयार की जा सकेगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर बनाए गए उपकरण के माध्यम से जल वाष्पीकरण की प्राकृतिक प्रक्रिया का उपयोग कर बिजली बनाई जाएगी।

इससे छोटे इलेक्ट्रिक उपकरण चार्ज किए जा सकेगे। इस तकनीक का उपयोग से मेडिकल उपकरणों के संचालन में किया जा सकेगा। ह्दय रोगियों के उपचार के लिए लगाए जाने वाले शरीर के अंदर लगाए जाने पेसमेकर व श्रवण बाधितों के कानों में लगाए जाने वाली डिवाइस में भी इस तकनीक का उपयोग होगा।

इन डिवाइस में इस तकनीक से तैयार मेंब्रेन का उपयोग कर वातावरण की नमी यहां तक कि मनुष्य के पसीने से भी मेडिकल उपकरणों को चार्ज किया जा सकेगा। वही डिजिटल वॉच में अभी जहां बैटरी व उसे चार्ज की समस्यां से भी इस तकनीक निजात मिलेगी। मेंब्रेन का उपयोग शरीर पसीने से ही डिजिटल घड़ियां चार्ज हो सकेगी।

आईआईटी इंदौर के प्रोफेसर धीरेंद्र के राय और शोधार्थी खुशवंत सिंह द्वारा संस्थान की सस्टेनेबल एनर्जी एंड एंवायरमेंटल मटेरियल्स (एसईईएम) लैब में इस हवा व पानी से बिजली तैयार करने की तकनीक विकसित की गई गई है।

ग्रैफीन ऑक्साइड की मेंब्रेन को पानी में डुबोते ही वाष्प से तैयार होती है बिजली

आईआईटी इंदौर की लैब में ग्रैफीन ऑक्साइड (कार्बन का एक परतदार रूप) और ज़िंक के बने यौगिक को मिलाकर तैयार की गई मेंब्रेन है। इस मेंब्रेन के आंशिक हिस्से को पानी से स्पर्श करवाया जाता है। उसके पश्चात पानी सूक्ष्म चैनलों के माध्यम से ऊपर की ओर बढ़ता है और वाष्प में तब्दील होना शुरू होता है।

वाष्पीकरण द्वारा संचालित यह गतिविधि मेम्ब्रेन के विपरीत सिरो पर पॉजिटिव और निगेटिव आयनों को अलग करती है, जिससे एक स्थिर वोल्टेज उत्पन्न होता है। इस तरह बिजली तैयार होना शुरू होती है। तीन बाई दो वर्ग सेंटीमीटर आकार की एक मेंब्रेन 0.75 वोल्ट तक बिजली तैयार करती है। जबकि कई मेम्ब्रेन को मिलाकर बिजली उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यह उपकरण साफ पानी के अलावा खारे अथवा मटमैले पानी के साथ बिजली तैयार कर सकता है।

घर, जंगल व खेतों में आसानी से तैयार होगी बिजली

आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों के मुताबिक इस तकनीक से जंगलों और खेतों में बिजली एलईडी जलाकर रोशनी की जा सकेगी। हालांकि इसके लिए विद्युत स्टोर करने के बैटरी की जरुरत होगी। वही खेतों में सिंचाई में उपयोग होने वाले आटोमेटिक सेंसर के संचालन में भी इसका उपयोग हो सकेगा। वही सोलर पैनलों से भिन्न, यह उपकरण घर के अंदर, रात में और बादलों वाली परिस्थितियों में भी काम करता है।

जल वाष्पीकरण की प्रक्रिया को ऊर्जा में बदलने से प्रौद्योगिकी के नई राह खुलेगी

जल वाष्पीकरण की साधारण प्रक्रिया को एक विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत में बदलकर, हमारे शोधकर्ताओं ने सतत प्रौद्योगिकी के लिए नए रास्ते खोले हैं। खासकर ग्रामीण और वंचित समुदायों में और एक स्वच्छ एवं अधिक समतापूर्ण भविष्य के निर्माण करने में विज्ञान अहम भूमिका निभाएगा। – सुहास जोशी, निदेशक आईआईटी इंदौर

स्वच्छ व स्थायी रूप से बिजली का सामाधान

यह एक एक सेल्फ़-चार्जिंग ऊर्जा स्रोत के रूप की तरह है जो हवा और पानी से ही चलता है। जब तक वाष्पीकरण जारी रहता है, यह उपकरण स्थायी रूप से बिजली उत्पन्न करता है। हमारा उद्देश्य एक ऐसा समाधान तैयार करना था जो किफ़ायती और प्रभावी दोनों हो। हमारी टीम मेंब्रेन को तैयार करने के लिए मांट मोरिलोनाइट विशेष क्ले का उपयोग करने वाली है। इससे उपकरण का खर्च काफी कम हो जाएगा। हमारा प्रयास यह है कि इस डिज़ाइन से बड़े पैमाने पर विद्युत निर्माण किए जा सके और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले उपकरणों का संचालन भी हो सके। – धीरेंद्र राय, प्रोफेसर, आईआईटी इंदौर

इन उपकरणों में होगा मेंब्रेन का उपयोग
  • ब्लूटूथ डिवाइस, मोबाइल भी हो सकेगा चार्ज
  • सिंचाई के स्प्रिंकल्चर को बंद चालू करने में होगा इस्तेमाल
  • शरीर के अंदर लगने वाल इम्प्लांट या उपकरणों को चार्ज करने की जरुरू हाेती है, उसमें होगा इस्तेमाल।
  • श्रवण बाधितों के हियरिंग डिवाइस में होगा उपयोग
  • डिजिटल घड़ी होगी चार्ज
  • सतत शुगर नापने के लिए शरीर पर लगाई वाल वियरेबल ग्लूकोज, लेक्टेट पैच का चार्ज करने में होगा इस्तेमाल
  • पहाड़ों में क्लाइमेंट सेंसर में होगा उपयोग।
Shreya News
Author: Shreya News

Leave a Comment

READ MORE

READ MORE

Join Us