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AIIMS Bhopal में अब बिना ऑपरेशन ठीक होगा फिशर, होम्योपैथी दवा से मरीजों को मिली 99% राहत

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श्रेया न्यूज़ द्रोपती धुर्वे शहडोल ;-  एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने एक अध्ययन में पाया है कि होम्योपैथी की एक दवा से एनल फिशर का इलाज बिना ऑपरेशन के संभव है। इस अध्ययन में 34 मरीजों को शामिल किया गया था, जिन्हें तीन महीने तक होम्योपैथी दवा दी गई थी। नतीजों में दर्द में 99% तक की कमी और घाव भरने में भी सफलता मिली है।

भोपाल। गुदा विदर (एनल फिशर) जैसी गंभीर और दर्दनाक बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल से एक बड़ी खुशखबरी आई है। एम्स के डाक्टरों ने एक अध्ययन में यह साबित किया है कि होम्योपैथी की एक दवा से इस बीमारी का इलाज बिना किसी ऑपरेशन के संभव है। इस सफलता के बाद अब मरीजों को असहनीय दर्द और सर्जरी की पीड़ा से मुक्ति मिलने की एक नई उम्मीद जगी है।

यह महत्वपूर्ण अध्ययन एम्स के आयुष (होम्योपैथी) विभाग के डॉ. आशीष कुमार दीक्षित और सर्जरी विभाग के डा. मूरत सिंह यादव की टीम ने मिलकर किया है। इस शोध में एनल फिशर से पीड़ित 34 मरीजों को शामिल किया गया। इन सभी को तीन महीने तक होम्योपैथी दवा ”पियोनिया ऑफिसिनेलिस” दी गई और साथ ही खान-पान में जरूरी परहेज और सुधार की सलाह दी गई।

तीन महीने के इलाज में आए चौकाने वाले नतीजे

तीन महीने के इलाज के बाद जो नतीजे सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। अध्ययन में शामिल मरीजों के दर्द में 99 प्रतिशत तक की आश्चर्यजनक कमी दर्ज की गई। इलाज से पहले जहां दर्द का स्तर 10 में से नौ अंक पर था, वह इलाज के बाद घटकर लगभग शून्य पर आ गया। इसके अलावा मल त्याग के दौरान होने वाला असहनीय दबाव भी पूरी तरह समाप्त हो गया। सबसे बड़ी सफलता यह रही कि 34 में से 30 मरीजों, यानी लगभग 88 प्रतिशत लोगों के घाव पूरी तरह भर गए। इस पूरे इलाज के दौरान किसी भी मरीज पर कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखा गया।

सरल और सुरक्षित इलाज का विकल्प

इस सफल अध्ययन पर डॉ. आशीष कुमार दीक्षित ने बताया कि हमारे नतीजे यह प्रमाणित करते हैं कि पियोनिया ऑफिसिनैलिस दवा एनल फिशर के दर्द को जड़ से कम करने, घाव को भरने और मल त्याग को सुगम बनाने में अत्यंत प्रभावी है। यह मरीजों को एक सरल और सुरक्षित इलाज का विकल्प देती है। वहीं, सर्जरी विभाग के डॉ. मूरत सिंह यादव ने कहा कि एनल फिशर के कई मरीजों को अंततः सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है, जो कष्टदायक हो सकती है। यह शोध एक सुरक्षित और बिना ऑपरेशन वाले इलाज का रास्ता खोलता है।

 

Shreya News
Author: Shreya News

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