श्रेया न्यूज़ सीमा सिंह शहडोल -: उमरिया की घुनघुटी पंचायत में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के लिए ट्रांसपोर्ट बिल में गड़बड़ी सामने आई। कार्यक्रम गोरईया में था, लेकिन बिल नौरोजाबाद का बना। कांग्रेस ने फर्जीवाड़ा बताया, सचिव का गैरजिम्मेदार बयान सामने आया। जांच की मांग तेज।
उमरिया जिले की घुनघुटी ग्राम पंचायत एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 4 जून को पाली जनपद की ग्राम पंचायत गोरईया में आयोजित पेसा एक्ट महासम्मेलन से जुड़ा है। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की गई थी। जिसका फर्जी बिल सामने आया है।
ट्रैवल एजेंसी द्वारा प्रस्तुत इस बिल में 13,000 रुपये का किराया दर्शाया गया है, जो चार गाड़ियों के नाम पर लिया गया है। इसमें कार 3,000, इको गाड़ी 3,000, इको गाड़ी 3,000 और तूफान गाड़ी का 4,000 रुपये का किराया लगाया गया है। हालांकि, बिल में ना तो किसी वाहन का नंबर दर्ज है, ना जीएसटी नंबर और किराया भी सामान्य से अधिक दर्शाया गया है। ऐसे में यह बिल सवालों में घिर गया है।
कांग्रेस ने साधा निशाना, बताया ‘फर्जीवाड़ा’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जानकी प्रसाद मिश्रा ने इस पूरे मामले को सुनियोजित फर्जीवाड़ा बताया है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम गोरईया में था, लेकिन बिल नौरोजाबाद का बना दिया गया। न जीएसटी नंबर है, न पारदर्शिता। ये घोटाला नहीं तो और क्या है? पैसा निकालने के लिए कागजों में हेराफेरी की गई है। उन्होंने स्वतंत्र जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पंचायत सचिव का गैरजिम्मेदार बयान
मामले को लेकर तत्कालीन पंचायत सचिव नयन सिंह से सवाल किया गया, तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि गलती से हो गया होगा। गाड़ी वाला जितना मांगता है, हम उतना दे देते हैं।








