सीमा सिंह शहडोल -: जिला प्रशासन द्वारा प्लास्टर आफ पेरिस से मूर्तियों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।नगर निगम द्वारा आमजन को मिट्टी की मूर्तियों के निर्माण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। नगर निगम सभागृह में आयोजित कार्यशाला में शहनाज बानो और सलमा बी के हाथों ने भी मिट्टी के श्रीगणेश की मूर्तियां गढ़ीं।
खंडवा। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी मूर्तियों पर प्रतिबंध लगने के बाद अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई शुरुआत की गई है। नगर निगम द्वारा आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में शहर की महिलाओं ने मिट्टी से बनी श्रीगणेश की सुंदर व सजीव मूर्तियां तैयार कीं। खास बात यह रही कि शहनाज बानो और सलमा बी जैसे कलाकारों ने अपने हाथों से चार-चार हाथों वाले भगवान गणेश की मनोहारी मूर्तियां बनाकर सभी का मन मोह लिया।
महिलाओं की कला को मिला मंच
उजाला स्वयं सहायता समूह की सदस्य शहनाज और सलमा के साथ-साथ अन्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं जैसे गणगौर, ऋद्धि-सिद्धि, महालक्ष्मी, खाटू श्याम, राधे कृष्णा आदि ने भी इस प्रशिक्षण में हिस्सा लिया और अपनी कलात्मक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। मिट्टी से मूर्ति निर्माण केवल एक कला नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बन रहा है।
ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों के लिए प्रशिक्षण
नगर निगम सभागृह में आयोजित इस कार्यशाला में मिट्टी से गणेश मूर्ति निर्माण का प्रशिक्षण धर्मेंद्र जौहरी और तन्वी जोशी द्वारा दिया गया। कार्यशाला में पहले दिन से ही 50 से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से शामिल रहीं। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल POP (plaster of paris) मूर्तियों के विकल्प प्रस्तुत करना था, बल्कि महिलाओं को स्वावलंबन की दिशा में प्रेरित करना भी था।
प्रतिभागियों का बढ़ाया हौसला
कार्यशाला के दौरान नगर निगम अध्यक्ष अनिल विश्वकर्मा और आयुक्त प्रियंका राजावत ने स्वयं मिट्टी की मूर्ति बनाकर प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया। आयोजन को सफल बनाने में जोन प्रभारी भुवन श्रीमाली और उनकी टीम दीपमाला कटारे, दीपिका श्रीवास्तव, रवि शर्मा, संदीप खराले, उमा हरवे ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निःशुल्क दुकान उपलब्ध कराने की घोषणा
निगमायुक्त प्रियंका राजावत ने घोषणा की कि जिन महिलाओं द्वारा मानकों के अनुरूप सुंदर श्रीगणेश मूर्तियां बनाई जाएंगी, उन्हें स्थानीय बाजार में निःशुल्क दुकान उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे मूर्तियों का विक्रय कर सकें। यह पहल महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने वाली है।







