शहडोल (सीमा सिंह )मध्य प्रदेश की एक यूनिवर्सिटी ऐसी है, जो लीग से हटकर और कुछ अलग ही काम कर रही है. उस यूनिवर्सिटी के फिशरीज डिपार्टमेंट ने तो कुछ ऐसा काम कर दिखाया है, जिसकी अब खूब चर्चा हो रही है. जब कोई यूनिवर्सिटी बच्चों के क्वालिटी एजुकेशन के लिए कैंपस में ही मछलियों का संसार बसा दे, तो वाकई ये अद्भुत है. शहडोल की पंडित शंभूनाथ शुक्ल यूनिवर्सिटी का फिशरीज डिपार्मेंट मछलियों को लेकर ऐसा काम कर रहा है, कि उसने मछलियों का पूरा संसार ही बसा दिया है.
यहां बसता है मछलियों का संसार
एक ही छत के नीचे कई प्रकार की रंग बिरंगी मछलियां और कई वेराइटी की वाइल्ड मछलियों का पूरा संसार बसाया गया है. यहां उन पर लगातार रिसर्च भी जारी है. शहडोल जिले के पंडित शंभू नाथ शुक्ल यूनिवर्सिटी के फिशरीज डिपार्मेंट के छात्र और टीचर्स ने मिलकर मछलियों के इस अद्भुत संसार को बसाया है, जिसे एक बार देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे. इसके जरिए कैसे बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देनी है, उन्हें स्टार्टअप के गुर सिखाने, और कैसे पढ़ाई के बाद वो पैसे कमा सकते हैं, इसके बारे में बताया जा रहा है. मछलियों पर हो रहे इस अनोखे काम की हर जगह जमकर तारीफ हो रही है, क्योंकि यहां मछलियों को लेकर बड़ा रिसर्च भी चल रहा है. उनकी ब्रीडिंग, एक्वेटिक प्लांट्स सब पर काम हो रहा है.
क्यों बसाया मछलियों का संसार ?
फिशरीज डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर वंदनाराम बताती हैं कि “हमारा जो न्यू एजुकेशन पॉलिसी है, वो पूरा स्किल बेस्ड है. इसी के अंतर्गत हम अपने फिशरीज डिपार्टमेंट में पीजी, यूजी और रिसर्च तक की डिग्री प्रोवाइड करा रहे हैं, जो कि हमारे यूनिवर्सिटी के अलावा आसपास दूर-दूर तक नहीं है. ऐसे में हमारा मकसद है कि हम यहां एक ऐसा माहौल तैयार करें. जिससे बच्चों को स्किल बेस्ड नॉलेज मिल सके.
वर्तमान में हम फिशेज का कलेक्शन कर रहे हैं, फिर चाहे वो आर्नामेंटल फिश हो, या फिर वाइल्ड फिश जो हमारे तालाब और नदियों में पाए जाते हैं. ऐसा करने का हमारा मकसद जो बच्चे यहां पढ़ने आते हैं, वो इसकी मारफोलॉजी उसकी फिजियोलॉजी इसके ब्रीडिंग बिहेवियर को समझ सके. इनका कल्चर जानकर फील्ड में स्टार्टअप कर सकें. जब ये काम प्रैक्टिकल तौर पर वो करेंगे तो ज्यादा सीख सकेंगे. पढ़ाई करने के बाद अपना खुद का स्टार्टअप भी वो स्टार्ट कर सकते हैं. जिसके लिए ज्यादा से ज्यादा मछलियों पर रिसर्च जरूरी है.

मछलियों पर रिसर्च करते बच्चे
फिश डाइवर्सिटी को लेकर रिच एरिया
डॉक्टर वंदनाराम बताती हैं कि “हमारा शहडोल संभाग आदिवासी बहुल इलाका है. यह एरिया फिश डाइवर्सिटी और एक्वेटिक प्लांट्स के मामले में बहुत रिच है. लेकिन इनका उपयोग कैसे किया जाए, ये किसी को पता नहीं है. वहीं हमारा काम है. यहां बच्चों को तैयार किया जाता है, जो यहां के एटमॉस्फेयर, फिश और एक्वेटिक प्लांट्स के डाइवर्सिटी का फायदा उठाते हुए नए-नए रिसर्च करते हैं. इससे उन बच्चों का भी फायदा होगा और क्षेत्र के लोगों का भी फायदा होगा.
ऐसा मध्य प्रदेश में पहला
डॉक्टर वंदना राम बताती हैं कि “अभी हाल ही में यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार कराया गया था. जिसमें सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन मुंबई के एक्स डायरेक्टर आए थे. साथ में कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक भी थे. सभी लोगों ने इसे सराहा और बताया कि मध्य प्रदेश में ऐसा कहीं नहीं देखा. डॉक्टर वंदना राम कहती हैं एमपी में यह पहला ऐसा होगा, जहां मछलियों का संसार है. उन पर इतने बड़े स्तर पर लगातार रिसर्च जारी है.
प्लांट्स की भी फार्मिंग
कई जगहों पर एक्वेरियम में आर्नामेंटल फिश रहती है. हम यहां पर कोशिश कर रहे हैं की इन मछलियों को नेचुरल एनवायरमेंट, हाइडिंग प्लेस, ब्रीडिंग प्लेस प्रोवाइड कराएं. उनको नेचुरल फूड प्रोवाइड कराने के लिए हम प्लांट्स की भी फार्मिंग करना शुरू कर चुके हैं. उसमें भी हमको अच्छी सफलता मिल रही है. हमारे क्षेत्र में तो ऐसे एक्वेटिक प्लांट्स बहुत ज्यादा पाए जा रहे हैं. बस उनको पहचानने की जरूरत है.

एक्वेरियम की तस्वीर
50 से ज्यादा वेरायटी
हमारे मछलियों के इस संसार में लगभग 50 से ज्यादा वैरायटी आ चुकी है. जिसमें आर्नामेंट्स और वाइल्ड फिशेज शामिल है. इसमें कुछ विशेष प्रजातियों की बात करें तो जैसे पैरेट, ऑस्कर, फेदर फिश, गोल्डफिश में एग्जॉटिक गोल्ड वैरायटी जो की जनरली यहां नहीं मिलते हैं. इसके अलावा हमारे पास फाइटर फिश भी है. उसकी भी ब्रीडिंग कराई गई. उसमें सक्सेसफुल हो चुके हैं. ऐसी कई मछलियां यहां पाई जा रही है, जो बहुत रेयर हैं.
ट्रेनिंग सेंटर की तरह तैयार स्टार्टअप
फिशरीज डिपार्टमेंट के एचओडी अमित निगम बताते हैं कि “ये बहुत ही कड़े परिश्रम और कई लोगों की मेहनत और सहयोग से संभव हो पाया है. एक तरह से अब यह स्टार्टअप ट्रेनिंग सेंटर की तरह तैयार हो चुका है. आज की जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति है, उसमें शोध के साथ व्यवसाय की स्किल भी बच्चों के अंदर पैदा करनी है. यहां पर हमने कुछ इस उद्देश्य को सफल बनाते हुए काम किया है. अब यहां अच्छे-अच्छे शोध हो रहे हैं. साथ ही उनमें सफलता भी मिल रही है. आर्नामेंटल फिश, एक्वेटिक प्लांट्स, लाइव एनिमल फूड प्लांट्स हर चीज पर रिसर्च हो रहा है.

शुक्ल यूनिवर्सिटी का फिशरीज डिपार्मेंट
ऐसी ट्रेनिंग, खुद करें अपना स्टार्टअप
फिशरीज डिपार्टमेंट के एचओडी बताते हैं कि हमने ऐसा सेटअप इसलिए भी तैयार किया है कि बच्चों को ऐसी ट्रेनिंग दे सकें, जिससे पढ़ाई के बाद वो अपना खुद का स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं. यहां पर बता दें कि हमारा इनकम भी शुरू हो गया है. जिसमें हम अपने शुरुआती एक्वेटिक प्लांट्स भी हेच चुके हैं. आर्नामेंटल फिश की भी सेलिंग हमने शुरू कर दी है. जो आर्नामेंटल फिश है, वो मार्केट में हंड्रेड रुपए में मिल रही होगी, उसे हम मात्र ₹30 में दे पा रहे हैं. हमारा विजन है कि शहडोल के हर पांच घर में एक फिश एक्वेरियम जरूर होगा.

मछलियों का स्टार्टअप
ऑर्नामेंटल फिश का बड़ा बाजार
देख जाए तो ऑर्नामेंट फिश का बहुत बड़ा बाजार है. ये बेस्ट स्टार्टअप हो सकता है. अभी जो शहडोल जिले में आर्नामेंटल फिश व्यापारी मंगवाते हैं, वो पश्चिम बंगाल या की साउथ के कुछ क्षेत्रों से मंगवा रहे हैं. ऐसे में वो बाहर से सारी चीजें मंगवा रहे हैं. अगर वही आर्नामेंटल फिश की ब्रीडिंग यहां होगी, तो सस्ता मिलेगा. बच्चों के लिए अच्छा आय का साधन होगा.
क्या होते हैं ऑर्नामेंटल फिश ?
आर्नामेंटल फिश सजावटी मछलियों को कहा जाता है. आपने कई रंग बिरंगी मछलियों को देखा होगा, जो की एक्वेरियम में कांच के अंदर पानी में मछलियां तैरती हुई नजर आ जाती है, वही आर्नामेंटल फिश कहलाती है. इसके अलावा आर्नामेंटल फिश को कई जगहों पर बड़ा शुभ माना जाता है. इसलिए भी कुछ लोग रखते हैं और धीरे-धीरे अब यह बहुत बड़े व्यापार का रूप ले चुका है.







