सीमा सिंह शहडोल -: अप्रैल माह के शुरू में आम उपभोक्ताओं को महंगाई के झटके पर झटके लग रहे हैं। घरेलू रसोई गैस और पेट्रोल महंगा हुआ ही था कि मध्य प्रदेश में बिजली महंगी होने की खबर भी आई गई। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के उपभोक्ताओं पर डबल अटैक हुआ है।
- डिपॉजिट मनी पर पहले मिलता था 6.75% ब्याज
- ब्याज दर घटाकर अब 6.50 प्रतिशत कर दी गई है
- रिजर्व बैंक की दरों के आधार पर लिया गया फैसला
मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली के दाम बढ़ा दिए है, लेकिन उपभोक्ताओं को प्रतिमाह जारी होने वाले बिजली बिल में जमा होने वाले सुरक्षा निधि पर ब्याज कम कर दिया है।
जानकारी के अनुसार बिजली कंपनी पहले उपभोक्ताओं को 6.75 फीसदी ब्याज देती थी। अब घटकर 6.50 प्रतिशत ब्याज दिया जाएगा।

… इसलिए घटाया गया ब्याज
पूर्व क्षेत्र कंपनी प्रतिवर्ष वित्तीय वर्ष की शुरुआत में लागू बैंक दर पर बिजली उपभोक्ता को जमा सुरक्षा राशि पर ब्याज की नई दर को घोषित करता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने नवीनतम मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में बैंक दर को संशोधित कर 6.50% कर दिया है, इसलिए पूर्व क्षेत्र कंपनी द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1 अप्रैल 2025 से उपभोक्ता सुरक्षा जमा पर 6.50 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करने का एक सर्कुलर जारी किया है।
यदि ब्याज राशि 10 हजार रुपए प्रति वर्ष से अधिक होने की संभावना है, तो आयकर अधिनियम के अनुसार 10 फीसदी की दर से टीडीएस कटौती की जाएगी। यदि उपभोक्ता पैन नहीं देता है या फिर पैन आधार से लिंक नहीं है तो ऐसी स्थिति में 20 फीसदी टीडीएस काटा जाएगा।
…और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में बदल गए हालात
इंदौर से खबर है कि पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में सर्तकता (विजिलेंस) विंग के बाहर खिड़की की नजारा बदला-बदला नजर आ रहा है। बिजली चोरी के प्रकरण और चालान बनाने वाली विजिलेंस विंग के दफ्तर के बाहर बीते दिनों जैसी उपभोक्ताओं की कतार और पास में बनी कैंटीन के आसपास घूमते दलाल अब नजर नहीं आते।
नईदुनिया वहां पहुंचा तो ऐसा ही दृश्य दिखा। विजिलेंस दफ्तर के अंदर भी सामान्य रफ्तार से काम होता नजर आया ना तो पहले ही तरह चालान खत्म करवाने या जुर्माने की राशि कम करवाने वाले उपभोक्ता किसी अधिकारी का इंतजार कर रहे थे। ना कि कोई दलाल अंदर किसी उपभोक्ता की फाइल लेकर घूमता दिखा।
नए नियम से बदला दृश्य
बिजली कंपनी के मुख्य सतर्कता अधिकारी कामेश श्रीवास्तव कहते हैं बाहरी तत्वों की एंट्री बंद करने के लिए सख्ती शुरू की गई। सर्तकता विभाग के अधीन करीब 60 से 70 हजार केस लंबित है। इनमें 1 लाख रुपये या उससे कम राशि के चालान के केस ही 50 हजार है।
बीते समय तक प्रत्येक केस में अपील करने उपभोक्ता को यहां आना होता था। जनवरी में बिजली कंपनी ने नियम को बदल दिया। आदेश जारी कर दिया है कि विद्युत चोरी व अनियमितताओं के सभी प्रकरण जिलमें राशि 1 लाख रुपये तक की है। उनमें आपत्तियों की सुनवाई और निवारण उन जिलों के कार्यपालन यंत्री ही कर सकेंगे। इससे बाहर के उपभोक्ताओं को अब इंदौर आने की जरूरत नहीं रही।







