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Inspiration: हाथ दिव्यांग, तो पांव के पंजों से लिखकर करती है पढ़ाई… जगदलपुर की राखी बनना चाहती है आईएएस

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  सीमा सिंह शहडोल -:     किसी काम को करने की ललक हो तो कोई कमी बाधा नहीं बन सकती है। यह कहानी है छत्तीसगढ़ के जगदलपुर की राखी की, जो नौवीं कक्षा में पढ़ती है। पिता रसोई गैस सिलेंडर की डिलीवरी करके घर पालते हैं।
  • आत्मानंद विद्यालय की नौवीं की छात्रा
  • आम बच्चों की तरह है राखी की राइटिंग
  • माता-पिता को अच्छा जीवन देना चाहती है
  •  नानगुर स्वामी आत्मानंद विद्यालय की नौवीं कक्षा की छात्रा राखी नाग विलक्षण हैं। वह जन्म से दिव्यांग है, परंतु पढ़ाई को लेकर ललक ऐसी है कि हाथ काम नहीं करते हैं तो पांव के पंजों से ही लिखने लगी।

सालों के अभ्यास से अब वह इतनी पारंगत हो चुकी है कि उसकी लिखावट किसी सामान्य बच्चे की तरह है, जो हाथों से लिखता है। राखी का परिवार कैकागढ़ पंचायत के बेंगलुरु गांव में रहता है।

पिता धनसिंह नाग एक निजी गैस एजेंसी के लिए साइकिल से गांव–गांव घूमकर गैस सिलेंडर की डिलीवरी करते हैं। माता चैती घरेलू महिला है और इमली, महुआ जैसे वनोपज संग्रहण से अर्जित आय से घर चलाने में योगदान देती है।

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कर्ज उतारने चाहती है बेटी

निर्धनता को माता–पिता ने कभी भी राखी की पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया और हमेशा ही उसे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। अब राखी का सपना पढ़–लिखकर आईएएस अधिकारी बनना है। वह क्षेत्र के विकास में योगदान देना चाहती है।

वह कहती है कि माता–पिता ने बड़ी तकलीफें झेलकर उसे पढ़ाया है और वह अपने माता–पिता को एक अच्छा जीवन देने की इच्छा रखती है।

Shreya News
Author: Shreya News

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