सीमा सिंह,शहडोल- दुर्घटना के शिकार लोगों के मामले में पुलिस की पूरी गाइड लाइन है, लेकिन ज्यादातर मामलों में इसका पालन नहीं होता। सबसे पहले पुलिस घायल व्यक्ति के बयान लेती है और उसी की जिम्मेदारी होती है परिवार को सूचित करना, जबकि जितने भी मामले सामने आए उसमे पुलिस ने समय पर कोई एक्शन नहीं लिया। इंदौर के एक मामले में बुजुर्ग का घर एमवाय अस्पताल से महज 15 मिनट की दूरी पर था, लेकिन उनकी मृत्यु के छह माह बाद पुलिस खबर देने उनके घर पहुंच पाई।
पालदा निवासी 85 वर्षीय बुजुर्ग बाबूलाल शर्मा हर अमावस व पूर्णिमा पर मोपेड से दो दिन के लिए महेश्वर जाते थे। 16 जनवरी 2024 को भी वे गए, लेकिन वापस नहीं लौटे तो बेटे राकेश ने गुमशुदगी दर्ज कराई।
परिजन छह महीने तक उन्हें ढूंढते रहे लेकिन कहीं कोई पता नहीं चला। अचानक एक दिन पुलिस घर पहुंची तो पता चला पिता महू के पास सड़क किनारे घायल अवस्था में 15 जनवरी को ही एंबुलेंस 108 को मिले थे। उनकी गोपेड भी वहीं थी।
एंबुलेंस वालों ने मोपेड और घायल को महू के मध्यभारत अस्पताल पहुंचाया। वहां से एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया। वे ठीक से बोल नहीं पा रहे थे और इलाज के दौरान 4 फरवरी को उनकी मौत हो गई। छह महीने तक उनकी मोपेड अस्पताल में ही खड़ी रही। बाद में डॉक्टर ने पुलिस को सूचना दी और फिर पुलिस परिजन तक पहुंची। इस बीच किसी ने भी मोपेड़ के नंबर आदि से शिनाख्त करने या परिजन तक पहुंचने की कोशिश नहीं की।
सोशल मीडिया से ढूंढा एमवाय अस्पताल में मृत मां का वीडियो
कर्नाटक के धारवाड़ की 55 वर्षीय रंजनारामचंद्र महंत तीर्थ यात्रा पर निकली थी। आठ माह बाद बेटे राजू को सोशल मीडिया पर सुल्ताने इंदौर एकता सेवा समिति के वीडियो में मां की मृत्यु की खबर मिली। बेटा पहुंचा तब तक अस्थियां भी विसर्जित हो चुकी थीं। दुर्घटना के बाद उन्हें एमवाय में भर्ती कराया था, जहां मौत हुई।
मां की मौत की खबर सुनते ही बेटे को हो गया ब्रेनहेमरेज
प्रयागराज की सुधा राधा दिसंबर 2024 को महाकाल दर्शन के लिए निकली थीं। बेटे शिवा को रेलवे पुलिस के कॉल से पता लगा कि मां उज्जैन में हादसे की शिकार हुई। खबर से शिवा को ब्रेन हेमरेज हुआ व मौत हो गई। परिजन को अफसोस रहा, समय पर खबर मिल जाती तो यह नौबत नहीं आती।
सबकी यही शिकायत, पुलिस पहले भी तो बता सकती थी
सुल्ताने एकता समिति के अध्यक्ष करीम पठान, जयदीप, फिरोज बताते हैं, घायलों के परिजन को सूचना देने का सिस्टम नहीं है। हमें तब सूचना दी जाती है जब अंतिम संस्कार कराना होता है। जो भी परिजन आते हैं, एक ही शिकायत करते हैं कि काश उन्हें पहले खबर कर दी जाती।







