Delhi . 30 Dec 2024 . Saniya Ansari
2024 में दिल्ली में अपराध बढ़े। धमकियों और फायरिंग से व्यापारियों में डर बना रहा। साइबर अपराध भी बढ़े। दिल्ली पुलिस और सरकार आपसी टकराव में उलझी रहीं। संगठित अपराध और हैकिंग के मामलों ने हालात बदतर कर दिए। यह साल अपराध के मामलों में चिंताजनक रहा।
दिल्ली में 2024 में अपराधियों का बोलबाला रहा। सड़कों से लेकर साइबर दुनिया तक,कानून तोड़ने वालों ने खूब उत्पात मचाया। पुलिस और आम जनता सुरक्षा के लिए जूझते रहे। बढ़ते जबरन वसूली के मामलों ने राजधानी को हिलाकर रख दिया। गैंगस्टरों ने दिल्ली को अपना अड्डा बना लिया। डर के मारे कई व्यापारियों ने चुपचाप पैसे देकर अपनी जान बचाई। गैंगस्टरों के गुर्गों की ओर से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर की गई गोलीबारी की घटनाओं ने दहशत फैला दी।
राजधानी में दहशत का माहौल
व्यापारियों में दहशत का माहौल था। कई लोग अंधेरा होने के बाद घर से बाहर निकलने से कतराने लगे। धमकियों से बचने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी कम कर दिया। दूसरी तरफ,फर्जी या “डिजिटल” गिरफ्तारियों और हैकिंग के मामलों ने लोगों को साल भर परेशान किया।
व्यापारियों में दहशत का माहौल था। कई लोग अंधेरा होने के बाद घर से बाहर निकलने से कतराने लगे। धमकियों से बचने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी कम कर दिया। दूसरी तरफ,फर्जी या “डिजिटल” गिरफ्तारियों और हैकिंग के मामलों ने लोगों को साल भर परेशान किया।
पुलिस को तकनीकी रूप से दक्ष अपराधियों और हथियारों के शौकीन बदमाशों से निपटने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। तकनीकी अपराधी एन्क्रिप्शन और गुमनाम नेटवर्क का इस्तेमाल करके पकड़े जाने से बचते रहे। वहीं,विदेशों में बैठे सरगना एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए अपने गुर्गों से वारदात करवाते रहे। दिल्ली की AAP सरकार और केंद्र की BJP सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगाती रहीं। इस बीच,विशेष अपराध इकाइयों पर आंतरिक कलह के कारण कामकाज प्रभावित होने के आरोप लगे।
इस बार अपराध का ग्राफ बढ़ा
शहर अराजकता की कगार पर पहुंच गया। ऐसे में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत महसूस हुई। नवंबर के अंत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई। इसके बाद पुलिस ने अपनी छवि सुधारने की कोशिश की। कागजों पर,यानी अपराध के आंकड़ों के अनुसार,पुलिस ने स्थिति संभाल ली। इस साल हत्याओं की संख्या 2023 के लगभग बराबर रही, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सवाल यह है कि क्या 2025 में कुछ बदलाव देखने को मिलेगा?
शहर अराजकता की कगार पर पहुंच गया। ऐसे में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत महसूस हुई। नवंबर के अंत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई। इसके बाद पुलिस ने अपनी छवि सुधारने की कोशिश की। कागजों पर,यानी अपराध के आंकड़ों के अनुसार,पुलिस ने स्थिति संभाल ली। इस साल हत्याओं की संख्या 2023 के लगभग बराबर रही, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सवाल यह है कि क्या 2025 में कुछ बदलाव देखने को मिलेगा?







