20 Dec 2024 . Saniya Ansari
भारतीय महानगरों में आज डीजल के दाम
| City | Diesel (₹/L) | Change (vs. – 1 Day) % |
|---|---|---|
| Chandigarh | ₹82.45/L | – |
| New Delhi | ₹87.67/L | – |
| Mumbai City | ₹90.03/L | – |
| Chennai | ₹92.48/L 0.09 | +0.1 |
| Lucknow | ₹87.81/L | – |
| Kolkata | ₹91.82/L | – |
भारत में डीजल के दाम को कैसे कैलकुलेट किया जाता है?
शहर के अनुसार डीजल के दाम
| City | Diesel (₹/L) | Change (vs. – 1 Day) % |
|---|---|---|
| Anantapur | ₹96.92/L 0.24 | -0.25 |
| Chittoor | ₹97.6/L 0.62 | -0.63 |
| Cuddapah | ₹96.87/L 0.15 | +0.16 |
| East Godavari | ₹96.72/L 0.29 | -0.3 |
| Guntur | ₹97.66/L 0.19 | +0.19 |
| Krishna | ₹97.59/L 0.52 | +0.54 |
| Kurnool | ₹97.72/L 0.68 | +0.7 |
| Nicobar | ₹78.05/L | – |
| North&middle Andaman | ₹78.05/L | – |
| South Andaman | ₹78.05/L | – |
भारत में डीजल के दाम पर असर डालने वाले टैक्स कौन से हैं?
भारत में डीजल पर टैक्सेशन का ढांचा इसकी रिटेल कीमत का एक महत्वपूर्ण निर्धारक है. भारत में डीजल की रिटेल कीमत में डीजल टैक्स की हिस्सेदारी 55 फीसदी है. केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य वैट (वैल्यू ऐडेड टैक्स) के अलावा, अन्य टैक्स भी हैं जो डीजल की कीमतों पर असर डालते हैं. रोड सेस: रोड सेस बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, खास तौर से से हाइवे और सड़क विकास से जुड़ी परियोजनाओं की फंडिंग करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से डीजल पर लगाई जाने वाली एक अतिरिक्त लेवी है. अतिरिक्त राज्य शुल्क: कुछ राज्य मानक वैट से परे डीजल की कीमतों पर अतिरिक्त शुल्क या सरचार्ज लगाते हैं. ये लेवी स्थानीय राजकोषीय नीतियों और आर्थिक स्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी): हालांकि डीजल और डीजल फिलहाल जीएसटी के अंतर्गत नहीं हैं, लेकिन इन ईंधनों को जीएसटी शासन के तहत लाने के बारे में समय-समय पर चर्चाएं उठती रहती हैं. यह कदम संभावित रूप से टैक्स ढांचे को आसान बना सकता है और राज्यों में कीमतों में दिखने वाले अंतर को कम कर सकता है.” लोकल बॉडी टैक्स: कुछ नगर निगम या स्थानीय निकाय अपने अधिकार क्षेत्र में डीजल की बिक्री पर टैक्स लगा सकते हैं, जो फाइनल रिटेल कीमत को और बढ़ा देता है. कस्टम ड्यूटी: मुख्य तौर पर आयातित कच्चे तेल पर असर डालते हुए, कस्टम ड्यूटी दरों में उतार-चढ़ाव इनडायरेक्ट तौर से आयातित डीजल की लागत और पंप पर इसके बाद के कीमत निर्धारण पर असर डाल सकता है.
भारत के हर प्रमुख शहर में डीजल के दाम में अंतर क्यों देखा जाता है?
भारत में कई शहरों में डीजल के दाम में अलग-अलग स्थानीय कारणों से अंतर देखा जाता है. स्थानीय टैक्स और शुल्क: भारत में प्रत्येक राज्य को डीजल पर अपना खुद का वैल्यू ऐडेड टैक्स (वैट) लगाने की स्वायत्तता है. इसकी वजह से शहरों में अलग-अलग टैक्स की दरें होती हैं. ऊंचे वैट दरों वाले राज्यों में आम तौर पर डीजल की कीमतें ज्यादा होती हैं. ट्रांसपोर्ट लागत: प्रमुख रिफाइनरियों या आयात टर्मिनलों से शहरों की दूरी ट्रांसपोर्ट लागत पर असर डालती है. इन सप्लाई पॉइंट्स के करीब के शहरों में परिवहन लागत कम हो सकती है जिसके चलते यहां डीजल की कीमतें कम हो सकती हैं. डीलर कमीशन: डीजल पंप डीलरों को प्रति लीटर बिक्री पर एक तयशुदा कमीशन मिलता है. स्थानीय बाजार स्थितियों और ऑपरेशनल लागत के आधार पर शहरों के बीच कमीशन दर थोड़ी अलग हो सकती है. स्थानीय मांग और मुकाबला: जिन शहरों में डीजल की ज्यादा मांग है या डीजल पंप संचालकों के बीच ज्यादा मुकाबला है, वहां अधिक प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण देखने को मिल सकता है. टैक्स डिमांड या कम कॉम्पीटीटर की वजह से मुकाबला कम होने की वजह से कीमतें ज्यादा हो सकती हैं. इन स्थानीय कारकों को समझने से भारतीय शहरों में डीजल की कीमतों में परिवर्तनशीलता को समझाने में मदद मिलती है, जो लोकल टैक्सेशेन नीतियों और तार्किक विचारों, बाजार की गतिशीलता और कंज्यूमर बिहेवियर के बीच अंतरसंबंध को उजागर करती है.







