Uttar Pradesh/Dharm . 21 Nov 2024 . Saniya Ansari
महाकुम्भ 2025 का आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में होगा। यह आयोजन विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सव माना जाता है, जिसमे करोड़ो श्रद्धालु संगम तट पर स्नान कर पुण्य अर्जित करेंगे। इस महाकुम्भ की तैयारियाँ उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के समन्वय से युद्ध स्तर पर चल रही है, जिसमे लगभग 5600 करोड़ रूपये खर्च किये जा रहे है।

कुम्भ मेले का इतिहास
कुम्भ मेले की शुरुआत का उल्लेख प्राचीन भारतीय गिरंथो में मिलता है। इसका आधार समुन्द्र मंथन की कथा है, जिसमे देवताओ और दानवो के बिच अमृत कलश को लेकर संघर्ष हुआ। यह आयोजन हर 12 वर्ष में होता है और प्रयागराज, हरिददुआर, उज्जैन, और नासिक में क्रमश: चार स्थानों पर आयोजित किया जाता है। मन जाता है की संगम (गंगा, यमुना, और अदृश्य सरस्वती का मिलन) पर स्नान से पापो का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
महाकुम्भ 2025 की विशेषताएं
टेंट सिटी की स्थापना: इस बार संगम तट पर 100 हेक्टेयर में टेंट सिटी तैयार की जा रही है, जिसमे 2000 बेड की व्यवस्था होगी। यहाँ विली, डीलक्स और सुपर डीलक्स श्रेणियों में आवास, फ़ूड कोर्ट, वैलनेस सेण्टर और यज्ञशालाएं होगी।
आधुनिक सुविधाएं श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर टूर, वाटर सपोर्ट्स, और रोमांचक गतिविधियों जैसे पेरासेलिंग और परमोटररिंग का भी अनुभव मिलेगा।
शटल बसें और आवागमन मेले में सुगम यात्रा के लिए 7000 से अधिक शटल बसें उपलब्ध कराइ जायगी।
सुरक्षा और सुविधा: संगम में स्नान और दर्शन को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल पंजीकरण प्रणाली लागु की गई है।







