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Depression: अवसाद के लक्षण और कारण, जानिए प्राणायाम और मंत्रों के जाप से कैसे पा सकते हैं तनाव से मुक्ति…..

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Delhi . 13 Nov 2024 . Saniya Ansari

अवसाद के लक्षण, प्रमुख कारणों के बारे में जानिए। साथ ही जानें कि प्राणायाम, मंत्रो का जाप, षट्कर्म और शंखप्रक्षालन की प्रक्रिया अपनाने से अवसाद से मुक्ति कैसे पाई जा सकती है।
Pranayama And Mantra For Depression and Anxiety Know Symptoms Causes
 अवसाद (डिप्रेशन) एक मानसिक रोग है। इसमें मन, विचार, भावनाएं अस्थिर अधोगामी (नीचे की तरफ) हो जाती है। इस बीमारी में मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा का अभाव होने की वजह से व्यक्ति की काम करने की शक्ति और क्रियाशीलता में कमी आ जाती है। अवसाद में दुःख, निराशा, उदासी, अशांति, थकान और अरूचि का होना स्वाभाविक बात है। निराशा और हताशा अकारण ही मन में चुभती जाती है,  जिससे व्यक्ति दुखी और लाचार रहता है। असफलता किसी भी व्यक्ति को निराश और परेशान करती रहती है। लगातार मिलने वाली असफलताओं से व्यक्ति में तनाव, तनाव से चिंता (एंग्जायटी), चिंता से अवसाद होता है। आज हम बताएंगे अवसाद के लक्षण, प्रमुख कारण और प्राणायाम, मंत्रों का जाप, षट्कर्म और शंख प्रक्षालन की प्रक्रिया अपनाकर अवसाद में कैसे मुक्ति पा सकते हैं?

अवसाद के मुख्य लक्षण

अवसाद के शारीरिक (शरीरगत) लक्षण

  • नींद का स्थिर न होना बल्कि अनियंत्रित नींद का होना।
  • कभी ज्यादा भूख लगना या कभी नही लगना, इसे अनियंत्रित भूख का लगना कह सकते है।
  • अवसाद की स्थिति में व्यक्ति को योन के प्रति रूचि का कम हो जाना।

अवसाद के मानसिक लक्षण

    • अवसादवादी व्यक्तियों में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की कमी देखने को मिलती है।
    • अवसादवादी व्यक्तियों में निराशावादी दृष्टिकोण देखने को मिलता है।
    • ऐसे व्यक्तियों का मन बहुत चलायमान रहता है। एक तरफ या किस एक चीज पर कभी फोकस नही रहता है, उनमें बहुत एकाग्रता की कमी पायी जाती है।
    • अवसादवादी व्यक्तियों में  प्रेरण की कमी का अभाव पाया जाता है

अवसादवादी व्यक्तियों में  आत्महत्या के विचार सबसे ज्यादा पाया जाता ह

 

अवसाद होने के प्रमुख कारण

अवसाद होने के अनुवांशिक कारण

जननिक रूप से अपने पूर्वजों और माता-पिता के माध्यम से बच्चों में पहुंचना। ऐसे बच्चों को अवसादग्रस्त होने की संभावना अधिक रहती है।

अवसाद होने के न्यूरोट्रांसमिशन कारण

डिप्रेशन में न्यूरोट्रांसमिशन रसायन मुख्य भूमिका निभाते हैं। न्यूरोट्रांसमिशन मस्तिष्क में पाए जाने वाले ऐसे रसायन हैं, जो दो न्यूरॉन्स के बीच में पाए जाते हैं। सूचनाओं के संचारण (फैलाने) के लिए उपयोगी होते हैं। सेरोटोनिन और नॉर एपिनेफ्रीन डिप्रेशन के लिए उत्तरदायी 2 न्यूरोट्रांसमीटर हैं। लयबद्धता के साथ शरीर और मस्तिष्क में इनकी उपस्थिति होती है। जब इन रसायन की कमी होती है तो डिप्रेशन पैदा होता है।

 

प्राणायाम, मंत्रों का जाप, षट्कर्म और शंख प्रक्षालन की प्रक्रिया अपनाने से अवसाद में कैसे पाएं मुक्ति ?
अवसाद कम करने के लिए षट्कर्म और शंख प्रक्षालन की प्रक्रिया का अभ्यास।
  • डिप्रेशन के उपचार के लिए नेति, अग्निसार क्रिया, नौली, शंख प्रक्षालन, कपालभाति और त्राटक का अभ्यास करना बहुत उपयोगी होता है।
  • जलनेति के नियमित अभ्यास के सिर के आगे के भाग की सफाई हो जाती है। सिर का भारीपन होना, सिर दर्द में लाभ मिलता है। चेहरे पर ताजगी आती है।
  • नित्य जल नेति के अभ्यास से अवसाद में लाभ मिलता है। अग्निसार क्रिया डिप्रेशन के रोगियों के लिए सबसे श्रेष्ट मानी जाती है, क्योंकि यह क्रिया तंत्रिका तंत्र को बहुत प्रभावित और उत्तेजित करती है । इस क्रिया के करने से अंतर्मुखी और निराशा ग्रसित व्यक्ति भी कई घंटो तक सामान्य व्यवहार करने लगता है।
  • शंखप्रक्षालन की प्रक्रिया पूरे शरीर की शुद्धि के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है। पानी की सहायता से सम्पूर्ण आहार नली की सफाई हो जाती है। इस प्रक्रिया से शरीर में जमा मल एवं विकार दूर हो जाते हैं, जिससे शरीर में कान्ति,  हल्कापन रहता है।

 

मंत्रो का जाप अवसाद कम करने के लिए
  • ऊँ उच्चारण, गायत्री मंत्र का जाप या महामृत्युंजय मंत्र अवसाद में कारगर होता है।  किसी भी एक मंत्र से जाप शुरू कर सकते हैं।
प्राणायाम का अभ्यास अवसाद कम करने के लिए

प्राणायाम शब्द संस्कृत के दो शब्दों प्राण और आयाम से मिलकर बना है। प्राण का अर्थ है सूक्ष्म जीवन शक्ति (प्राणशक्ति) और आयाम का अर्थ है प्रसार, नियंत्रण और विस्तार करना। प्राणशक्ति शरीर के विभिन्न अंगों को ऊर्जा देती है और जीवन की विभिन्न महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर नियंत्रण भी करती है।

प्राणायाम मन और मस्तिष्क के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। मस्तिष्क में ब्लड का सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे मस्तिष्क में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ती है जिससे हम ज्यादा ऊर्जावान और शक्तिशाली  महसूस करते है। प्राणायाम में नाड़ीशोधन भ्रामरी, भस्त्रिका, सूर्यभेदी प्राणायाम किया जा सकता है। डिप्रेशन में प्राणायाम बहुत ही सबल (बलवान या ताकतवर) और कारगर माना गया है। नाड़ीशोधन प्राणायाम के अभ्यास से न केवल शरीर एवं नाड़ियों की अशुद्धियाँ और अवरोध दूर होते है बल्कि ये अवसाद में भी काफी लाभकारी होता है।

 

 

Shreya News
Author: Shreya News

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