Madhya Pradesh . 11 Nov 2024 . Saniya Ansari
उमरिया: अगर अवैध शराब के अवैध कारोबार की जड़ के जाने के बारे में जानने की कोशिश करे तो जानकारी जानकर आपभी चौक जायगे। वास्तविक यह है कि शराब का अवैध धंधा ठेकेदारों का ही फंदा होता है। ठेकेदार शराब कि जो दुकान ठेके पर लेता है। उस क्षेत्र में दर्जनों दुकाने चलता है, ढाबे वाले, होटल वाले, गुमटी वाले, कई घरो से, कई चाय की दुकान से, कोई पान की दुकान से आदि अनेक प्रकार से शराब का अवैध कारोबार होता है। इन सब दुकान पर वह शराब अपने दो पहिया व चार पहिया आदि के माध्यम से सप्लाई कि जाती है। यह दो पहिया और चार पहिया जिले में एक प्रोडक्ट कि तरह मार्केटिंग करते हुए अवैध शराब का परिवहन करती है। जिसकी जानकारी पुलिस विभाग के साथ-साथ जिला आबकारी विभाग को भी होती है, लेकिन जिला आबकारी विभाग द्वारा इस अवैध शराब पर किसी भी तरह कि कोई कार्यवाही नहीं कि जाती। जिससे या व्यापर इन साधनो के माध्यम से दिन दुगनी रात चौगुनी के तर्ज पर विकास कर रहा है और ठेकेदार के साथ-साथ आबकारी अधिकारी की जेब भी गर्म कर रहा होगा अन्यथा कार्यवाई न होना समझ से परे है।
खानापूर्ति तक सिमटी कार्यवाही
जिला आबकारी अधिकारी द्वारा जब से जिले में पदस्थ हुए है। संभवत अवैध शराब माफियाओ पर शायद ही कोई बड़ी कार्यवाही की होगी। हाँ यह ज़रूर है कि कागजी खानापूर्ति के लिए कच्ची शराब के केस, महुआ से बनी शराब आदि के केस बनाकर इतिश्री कर ली जाती है। आबकारी विभाग द्वारा जिले में जहाँ-जहाँ इस तरह की केस बनाये भी गए हो जो मात्र खानापूर्ति कर इतिश्री कि गई। जबकि उमरिया, मानपुर, नौरोजाबाद, करकेली, बिरसिंगपुर पाली सहित दर्जनों दुकानों से अवैध शराब का परिवहन बिक्री खुलेआम हो रहा। जिसकी जानकारी आबकारी अधिकारी को होने के बाद भी कोई कार्यवाही न होना। इस ओर संकेत करता है कि सारा अवैध शराब का कारोबार आबकारी अशिकारी के संरक्षण में ही फल-फूल रहा है।
पूछने लगते है इतिहास
आबकारी अधिकारी के गैर ज़िम्मेदाराना रवैया के व कार्य शैली ने जिले में अवैध शराब का कारोबार बढ़ रहा है। आज जिले में कही पर किसी भी बच्चे से पूछ लिया जाये शराब कहा मिलती है तो, आसानी से उस स्थान का पता बता देगा। इस तरह इस आबकारी अधिकारी के कार्यकाल में जिले में अवैध शराब के मामले तेज़ी से विकास किया है। कार्यवाही के नाम पर महुआ शराब कारोबारियों पर एक अपनी पीठ थपथपाने वाल आबकारी विभाग कभी भी कोचिया पर कार्यवाही करता नजर नहीं आया। अगर किसी के द्वारा अवैध कोचियों के बारे में जानकारी भी दी जाये तो साहब इतने अनजान बन जाते है जैसे उन्हें कुछ पता ही न हो और उल्टा सुचना देने वाले से जगह और व्यक्ति का नाम पूछने लगते है। अगर जगह और व्यक्ति का नाम बता दिया जाये तो फिर अगले कि जन्मकुंडली और इतिहास पूछने लगते है कि उसके पिता का क्या नाम है। उसके नाना मामा का क्या नाम है, कितने भाई है, क्या कहते है क्या पिटे है कैसे रहते है। जबकि आबकारी विभाग को हर वो जगह और आदमी पता है। जहाँ कोचिया शराब बिकती है।







