Uttar Pradesh / Politics . 21 Oct 2024 . Saniya Ansari
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, यूपी अध्यक्ष अजय राय ने प्रदेश में पार्टी की स्थिति को देखते हुए अपनी ओर से मजबूत दावेदारी करने के अपने निर्णय से पार्टी आलाकमान को अवगत करा दिया है। अब सपा और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस पर अंतिम निर्णय लेगा।

यूपी में नौ सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव से कांग्रेस ने फिलहाल किनारा कर लिया है। समाजवादी पार्टी ने गठबंधन के तहत कांग्रेस को गाजियाबाद और खैर की दो विधानसभा सीटें दी है, जबकि कांग्रेस अपने लिए पांच सीटों पर दावेदारी कर रही है। कांग्रेस गाजियाबाद और खैर की बजाय अपने लिए सीसामऊ, फूलपुर और मझवां सीटों पर दावेदारी कर रही है। इन सीटों पर समाजवादी पार्टी से बात न बनते देख कांग्रेस ने दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी ने कहा है कि यदि उसे सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो वह चुनाव से दूर रहेगी।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, सबसे बड़ी पेंच गाजियाबाद और खैर विधानसभा सीटों को लेकर है। ये दोनों सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस लंबे समय से जीत दर्ज नहीं कर पाई है। यदि उपचुनाव में वह इन सीटों पर उतरती है तो भी उसके लिए जीत की संभावनाएं बहुत कम रहेंगी। जबकि यदि फूलपुर और मझवां सीटों पर वह उतरती है तो न केवल उसको जीत मिल सकती है, बल्कि इन क्षेत्रों में उसकी कमजोर होती पकड़ को भी मजबूती मिल सकती है। यही कारण है कि कांग्रेस ने इन सीटों को लेकर अपना दबाव बढ़ा दिया है। वहीं, इन सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर चुके अखिलेश यादव के लिए पीछे हटना मुश्किल हो रहा है। यही कारण है कि दोनों दलों में पेंच फंस गया है।
दरअसल, सपा अध्यक्ष यूपी के अलावा कुछ अन्य राज्यों में अपना पैर पसारकर अपनी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाना चाहते हैं। इसी कोशिश में वे हरियाणा भी गए थे, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। अब वे महाराष्ट्र में भी इसी जुगत में लगे हैं। लेकिन सपा के मैदान में आने से लगभग एक दर्जन सीटों पर मुसलमान वोटों में बंटवारा हो सकता है। इसका नुकसान इंडिया गठबंधन के दलों को होगा। माना जा रहा है कि यूपी में दबाव बढ़ाकर कांग्रेस नेतृत्व सपा को महाराष्ट्र में एक-दो सीटों पर समेटने का दांव भी आजमा रहा है, जो कम से कम एक दर्जन सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।







