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तो क्या रविंद्र सिंह भाटी की वजह से बाड़मेर में भाजपा की हुई करारी हार, सामने आए 7 चौंकाने वाले आंकड़े

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श्रेया न्यूज़
Rajasthan Politics: भाजपा के प्रत्याशी जाट हैं। दो जाट उतरते ही राजपूत इस सीट के लिए अपना आदमी खड़ा करने की जिद्द पर थे। शिव विधायक रविन्द्रसिंह उनके पास चेहरा था, लिहाजा रविन्द्र को पूरे समाज ने साथ दिया।

बाड़मेर•Jun 07, 2024 / 02:04 pm•padma mishra 

Ravindra Singh Bhati
Rajasthan Politics: बाड़मेर में कांग्रेस की जीत का आधार उसका बेसिक फार्मूला रहा। जातिगत वोटों का गणित कांग्रेस के पक्ष में रहते ही राह आसान हो जाती है। कांग्रेस की हार बड़े नेताओं की लड़ाई पर होती है और जीत का तरीका है इनका एक रहना। भाजपा का धरातल विधानसभा चुनावों के बाद खिसक गया था। पहले दिन से हार की लड़ाई लड़ी जा रही थी। बड़े नेताओं को भी पता था कि मुश्किल हैै लेकिन मुमकिन करने को ताकत झौंकने में कमी नहीं रखी।
जेएमएम फार्मूला

कांग्रेस के लिए बाड़मेर में जातिगत वोट बैंक का एक फार्मूला है, जेएमएम यानि जाट, मुसलमान, मेघवाल। कांग्रेस ने इस बार इस फार्मूले पर काम किया। तीनों ही बड़े वोट बैंक पक्ष में रहने से कांग्रेस के लिए जीत की राह आसान हुई।

नेताओं ने लड़ाई खत्म की

कांग्रेस में बड़े नेताओं की लड़ाई की वजह से नीचे के स्तर इसका असर जाता है। इस चुनाव में कांग्रेस के बड़े नेता एक हो गए। कद्दावर नेताओं के बाद में दूसरी कतार के नेताओं ने भी फोलोवर्स की भूमिका निभाई तो कहीं पर वे चुप रहकर साथ हो गए।

हरीश चौधरी-हेमाराम चौधरी चल पड़े

कांग्रेस ने यहां चुनाव की पूरी कमान बायतु विधायक हरीश चौधरी के हाथ दे दी। हरीश चौधरी ने हेमाराम चौधरी को साथ ले लिया। इस जोड़ी ने मुसलमान नेताओं को अपने पक्ष में करने का कार्य किया। अमीनखां की वजह से जो बड़ा वोट बैंक खिसकने की नौबत थी,उसमें सैकण्ड लाइन को पकड़ लिया। ऐन समय पर चौहटन के गफूर अहमद को जिला अध्यक्ष बनाकर तुरूप का पत्ता खेला।

रालोपा से कांग्रेस में लाने की राजनीति

प्रत्याशी उमेदाराम बायतु से रालोपा से चुनाव हारे थे। नागौर में रालोपा ने गठबंधन किया ,लेकिन बाड़मेर में उमेदाराम को कांग्रेस में लाया गया। यदि रालोपा से गठबंधन होता तो कांगे्रस का बड़ा वोट बैंक यहां साथ देता या नहीं, यह संशय था। कांग्रेस के पक्ष में यह निर्णय भी रहा।

लोकल स्टार

कांग्रेस ने पूरे चुनाव में लोकल को कमान का फार्मूला चलाया। मुयमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा, सचिन पायलट नामांकन दाखिले या एक दो बार जरूर आए लेकिन वास्तव में यहां लोकल नेताओं ने ही स्टार प्रचारक का रोल निभाया। बड़ी सभाओं से ज्यादा वन टू वन पर चले।

जमीन खिसका दी

भाजपा के प्रत्याशी जाट हैं। दो जाट उतरते ही राजपूत इस सीट के लिए अपना आदमी खड़ा करने की जिद्द पर थे। शिव विधायक रविन्द्रसिंह उनके पास चेहरा था, लिहाजा रविन्द्र को पूरे समाज ने साथ दिया। ऐसा होते ही भाजपा की जमीन खिसक गई। जाट एक होकर कांग्रेस के साथ रहे और इधर राजपूत अलग हो गए। अब केवल मूल ओबीसी पर भरोसा रहा, जिनके सारे वोट मिले तो भी पूरे पड़ना मुश्किल था।

अब वोट बैंक कौन

भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है कि उसका वोट बैंक कौन है? जहां कांग्रेस 5 लाख से अपने वोटों की गिनती मानती है वहीं भाजपा गिनाने के लिए काडर वोट की बात करती है लेकिन वो काडर बार-बार खिसक जाता है। ऐसे में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है कि वह अपना वोट बैंक बनाए।

Shreya News
Author: Shreya News

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