श्रेया न्यूज़ सीमा सिंह शहडोल -: MP News: जयसिंहनगर क्षेत्र से छत्तीसगढ़ भेजी जा रही अंग्रेजी शराब की बड़ी खेप को ग्रामीणों ने ग्राम विनायका में पकड़ा लिया, लेकिन आबकारी और पुलिस की लापरवाही के कारण ठेकेदार के गुर्गे ग्रामीणों से गाड़ी छीनकर भाग गए। इस दौरान ग्रामीणों ने पकड़ी गई शराब की खेप का वीडियो मोबाइल में कैद कर लिया, जो सोशल मीडिया में तेजी से प्रसारित हो रहा है।
शहडोल। जिले में शराब तस्करी जोरों पर चल रही है। जयसिंहनगर क्षेत्र से छत्तीसगढ़ भेजी जा रही अंग्रेजी शराब की बड़ी खेप को ग्रामीणों ने ग्राम विनायका में पकड़ा लिया, लेकिन आबकारी और पुलिस की लापरवाही के कारण ठेकेदार के गुर्गे ग्रामीणों से गाड़ी छीनकर भाग गए। इस दौरान ग्रामीणों ने पकड़ी गई शराब की खेप का वीडियो मोबाइल में कैद कर लिया, जो सोशल मीडिया में तेजी से प्रसारित हो रहा है।
ठेकेदार के गुर्गे वाहन छीन कर भागे
जानकारी के अनुसार टेटका बस स्टैंड से होकर जंगल के रास्ते सीधी बार्डर के ग्राम चांटी के होते हुए छत्तीसगढ़ के लिए अंग्रेजी शराब भेजी जा रही थी। ग्रामीणों को इसकी भनक लगी तो विनायका ग्राम पंचायत के सरपंच अमृतलाल सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने मिलकर संदिग्ध वाहन (सीजी-04-एलएफ-8601) को पकड़ लिया। वाहन में भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब लदी थी। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस हेल्पलाइन नंबर और जयसिंहनगर पुलिस को दी, लेकिन पुलिस नहीं पहुंची तो ठेकेदार के गुर्गे वाहन छीन कर भाग गए।
ग्रामीणों को धमकाकर भागे गुर्गे
सरपंच के अनुसार उन्होंने थाने में पदस्थ एक विनोद नामक पुलिसकर्मी को भी खबर दी थी, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद नहीं पुलिस। इसी देरी का फायदा उठाते हुए कथित शराब ठेकेदार दीपक गुप्ता अपने कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों को धमकाकर शराब लदे वाहन को छीनकर भाग गया। ग्रामीणों का कहना है कि यहां लंबे समय से जयसिंहनगर से होकर छत्तीसगढ़ तक शराब की तस्करी का नेटवर्क चल रहा है। शराब की हर खेप के पीछे स्थानीय ठेकेदारों और उनके कर्मचारियों का हाथ है, लेकिन पुलिस और आबकारी विभाग अनदेखी कर रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण- ग्रामीण
सरपंच अमृतलाल सिंह ने बताया हमने नशा मुक्ति अभियान के तहत तस्करी रोकने की कोशिश किया और पुलिस को सूचना दी लेकिन वे नहीं आए। शराब ठेकेदार के लोग गाड़ी छीनकर भाग गए। अब गांव में भारी रोष है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि आखिर शराब ठेकेदारों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं।







