श्रेया न्यूज़ सीमा सिंह शहडोल -: न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और बयान में किसी प्रकार की भड़काऊ या आपत्तिजनक मंशा नहीं पाई गई, इसलिए परिवाद निरस्त किया जाता है।
न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट सीताशरण यादव ने बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ प्रस्तुत परिवाद को निरस्त कर दिया। यह निर्णय उस समय आया जब पंडित शास्त्री के एक विवादास्पद बयान को लेकर एक अधिवक्ता द्वारा आरोप लगाया गया था कि उनके शब्दों से एक नागरिक वर्ग को आहत किया गया है।
पंडित शास्त्री की ओर से पेश हुए अधिवक्ता समीर अग्रवाल ने न्यायालय में तर्क प्रस्तुत किया कि पंडित शास्त्री द्वारा कहे गए शब्द किसी भी तरह से भड़काऊ या अमर्यादित नहीं थे। उनका कहना था, इतना स्पष्ट है कि पंडित शास्त्री का बयान किसी को उकसाने, अपमानित करने या दुष्प्रेरित करने के उद्देश्य से नहीं था। उनका बयान एक धार्मिक समारोह का हिस्सा था और इसे ऐसे नहीं लिया जाना चाहिए।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद पाया कि प्रस्तुत परिवाद में कोई ठोस आधार नहीं है। न्यायालय ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा, प्रस्तुत बयान से यह प्रमाणित नहीं होता कि पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने किसी वर्ग, सम्प्रदाय या व्यक्ति की भावनाओं को आहत करने का प्रयास किया है।और परिवाद को किया निरस्त कर दिया है।







