श्रेया न्यूज़ सीमा सिंह शहडोल -: Shahdol News : शहडोल के एक छात्रावास में रहने वाले छात्र की जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई है। छात्र को बुखार आ रहा था, पहले शहडोल में ही इलाज चल रहा था, लेकिन आराम न होने पर उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। छात्र की मौत के बाद परिजनों ने आरोप लगाया है।
अनुसूचित जाति छात्रावास के छात्र की जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई है। छात्र का इलाज पहले शहडोल में चल रहा था। छात्र संभागीय मुख्यालय के पुलिस लाइन पटेल नगर के पास संचालित सीनियर अनुसूचित जाति छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहा था। छात्र का नाम राजा प्रजापति (15) था। कक्षा 10वीं का छात्र था। छात्र के निधन से हॉस्टल के छात्रों में गम का माहौल है।
गौरतलब है कि 22 अगस्त को छात्र की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उसे जिला अस्पताल की पीआईसीयू में भर्ती करना पड़ा। यहां जब हालत में सुधार नहीं हुआ, तो उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां मौत हो गई। छात्र को बुखार आ रहा था। इसके बाद उसे निमोनिया हो गया। परिजनों का आरोप है कि यहां के अधीक्षक रमेश द्विवेदी ने छात्र के समय पर उपचार नहीं दिलाया और जब उसकी हालत बिगड़ गई तब अस्पताल लेकर गए हैं।
मृतक छात्र को कई दिनों से आ रहा था बुखार
छात्रावास के छात्रों ने भी बताया कि राजा को कई दिन से बुखार आ रहा था। मृतक छात्र ने अपनी परेशानी का जिक्र साथियों से और शिक्षकों से किया था। लेकिन गंभीरता से नहीं लिया गया। जब हालत बिगड़ने लगी, तो अस्पताल लेकर गए, जिसके कारण मौत हो गई है। मृतक के माता-पिता दोनों इस दुनिया में नहीं है। एक बहन है और दोनों-भाई बहन चाचा-चाची के संरक्षण में पल रहे थे। चाचा पप्पू प्रजापति ने बताया कि जब अस्पताल में भर्ती किए हैं, तब सूचना दी गई है। अचानक इतनी जल्दी तबीयत कैसे बिगड़ सकती है?
छात्र की मौत बीमारी से हुई- एसबीएस चंदेल
कहीं न कहीं लापरवाही हुई है, जिसके कारण भतीजे की जान चली गई है। मौत के अधीक्षक के आए थे और मामले को इधर-उधर नहीं करने की बात करे थे। छात्रावास में यदि समय पर ध्यान दे दिया गया होता तो शायद जान नहीं जाती। वहीं, विकासखंड शिक्षा अधिकारी एसबीएस चंदेल ने बताया कि छात्र की मौत बीमारी से हुई है। कलेक्टर और सहायक आयुक्त की जानकारी में भी मामला है। जिला अस्पताल में उपचार दिलाया गया। हालात में सुधार नहीं हो रहा था, तो जबलपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया था, वहां मृत्यु हो गई है। हमे बच्चे की मौत का बहुत दुख है। यदि लापरवाही हुई है, तो हम छात्रावास में जाकर जांच कराएंगे।







