सीमा सिंह शहडोल -: घटनाक्रम मध्य प्रदेश के शिवपुरी का है। परिवार का कहना है कि जयदीप 10वीं का छात्र था और कोई बीमारी नहीं थी। इस बीच, कम उम्र में साइलेंट अटैक (Silent Heart Attack) के बढ़ते मामलों ने सभी की चिंता बढ़ा दी है।
- डॉक्टर बोले एचओसीएम के कारण हो रहा ऐसा
- सांस फूलना, स्ट्रेस होना, थकान होना आम लक्षण
- मेडिकल जांच में ही बीमारी का पता लग सकता है
शहर के फिजिकल थाना अंतर्गत इंद्रा कॉलोनी में रहने वाले 16 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। घटना से कुछ देर पहले ही बेडमिंटन खेलकर घर आया था। खाना खाते समय घबराहट हुई। स्वजन उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
घटना का कारण साइलेंट अटैक (Silent Heart Attack) बताया गया है, हालांकि स्वजन का कहना है पहले उसे कभी कोई दिक्कत नहीं हुई थी। कम उम्र में साइलेंट हार्ट अटैक की चर्चा पूरे शहर में हो रही है।
इंद्रा कॉलोनी निवासी जयदीप राठौर के चाचा सचिन राठौर ने बताया कि उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने गंभीर हालत देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने करीब एक घंटे तक प्रयास किया, लेकिन उसकी सांसें नहीं लौट सकीं। जयदीप 10वीं का छात्र था।
हाल में ही सामने आया तीसरा मामला
- शिवपुरी के रन्नौद में चार मार्च को शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं की परीक्षा देते समय 17 वर्षीय शिवम शर्मा अचानक पसीना आने के बाद बेहोश हो गया था। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने साइलेंट अटैक की बात कहकर ग्वालियर रेफर किया था। अब वह स्वस्थ है।
- शिवपुरी की फक्कड़ कॉलोनी निवासी 21 वर्षीय पवन रजक सात मार्च को सिद्ध बाबा मंदिर पर प्रसाद लेते समय अचानक गिर पड़ा। स्वजन उसे अस्पताल लेकर आए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
साइलेंट अटैक नहीं, एचओसीएम है मौत का कारण
युवा बच्चों की लगातार संदिग्ध मौतों के बढ़ते मामलों या यूं कहें कि साइलेंट अटैक के बढ़ते मामलों को लेकर जब मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. दिनेश राजपूत से बात की गई तो उनका कहना था कि यह हार्ट अटैक नहीं, बल्कि एचओसीएम (हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी) है।
यह हृदय की रक्त वाहिकाओं का विकार है। इसमें निलयों (हृदय के दो निचले कक्ष) की दीवारें मोटी और कड़ी हो जाती है। डॉ राजपूत के अनुसार, इसमें बच्चा जब ज्यादा मेहनत जैसे रनिंग, एक्सरसाइज आदि करता है तो उसके हार्ट को ज्यादा खून की आवश्यकता होती है, लेकिन उक्त विकार के कारण हृदय को पर्याप्त मात्रा में खून नहीं मिल पाता है और यह हालात निर्मित हो जाते हैं।
डॉक्टर राजपूत बताते हैं कि एचओसीएम नामक विकार युवाओं में पाया जाता है। हार्ट अटैक में तो मरीज को उपचार का मौका मिल जाता है, लेकिन एचओसीएम में अचानक से तबीयत खराब होती है और ज्यादातर लोगों की मृत्यु हो जाती है।
हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी के ये हैं लक्षण
- डॉ राजपूत बताते हैं कि एचओसीएम का सामान्य लक्षणों से पता किया जा पाना कठिन है। इसका पता मेडिकल जांचों के बिना नहीं किया जा सकता है।
- एचओसीएम में तेज चलने पर सांस फूलना, स्ट्रेस होना, थकान होना, खाना न खाना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन बच्चों में इन्हें सामान्य मान लिया जाता है।
- स्वजन सोचते हैं कि बच्चा खेलकर आया है, थक गया होगा और इसी कारण खाना नहीं खा रहा। ज्यादा दौड़ने या खेलने के कारण सांस फूल रही होगी। यही वजह है कि एचओसीएम की स्थिती सामान्य रूप से समझ में नहीं आती है।







