सीमा सिंह शहडोल – मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुनवाई के दौरान जज ने मार्मिक कविता सुनाई। सरकारी वकील ने कहा अगर अब भी हम न सुधरे तो एक दिन ऐसा आएगा, इस देश को बेटी देने में भगवान भी जब घबराएगा। न्यायाधीश ने फैसले में कहा जो नारी का अपमान करे, क्या वो मर्द हो सकता हैं क्या जो इंसाफ निर्भया को मिला, वह मुझे मिल सकता है।
- 6 साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में आया फैसला।
- माता-पिता के पास सो रही बच्ची को उठा ले गया था दोषी।
- रेप के मामले में अदालत ने महज 88 दिनों में सुनाया फैसला।
सिवनी-मालवा में 3 जनवरी को 6 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के बाद हत्या करने के मामले में शुक्रवार को प्रथम अपर सत्र न्यायालय सिवनी मालवा तबस्सुम खान, द्वारा सनसनीखेज दुष्कर्म एवं हत्या के प्रकरण में आरोपित अजय को दुष्कर्म एवं हत्या के अपराध के लिए धारा 137(2), 64, 65(2), 103(1), 66 बीएनएस 5 (एम), 6 पाक्सो में मृत्युदंड एवं 3000 रूपये के अर्थदंढड की सजा दी गई।
पीड़िता के माता-पिता को चार लाख रूपये का प्रतिकर स्वरूप दिये जाने का आदेश पारित किया गया। जिला अभियोजन अधिकारी राजकुमार नेमा ने बताया कि फरियादी द्वारा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी कि 2 जनवरी 2025 के करीब 9 बजे कोई उसकी 6 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर ले गया, मैंने अपनी बच्ची को पूरा गांव व आसपास में तलाश किया, लेकिन वह नहीं मिली। मुझे शंका है कि अजय ही मेरी बच्ची को उठाकर ले गया है।
चिल्लाई तो मुंह दबाकर हत्या कर दी

विवेचना के दौरान आरोपी अजय को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने अपने बयान में स्वीकार किया कि वह पीड़िता को उसके घर से उठाकर ले गया था, झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया जब वह चिल्लाई तो उसका मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी और शव को झाड़ियों में फेंक दिया।
विवेचना में आरोपित अजय के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य होने से अंतिम प्रतिवेदन धारा 137(2), 64, 65(2), 103(1), 66, बीएनएस, 5 (एम), 6 पाक्सो एक्ट के अंतर्गत न्यायालय में पेश किया। अभियोजन द्वारा 39 साक्षियों की गवाही कराई, सभी ने घटना का समर्थन किया।
अभियोजन ने कुल 96 दस्तावेज एवं 33 आर्टिकल प्रदर्शित कराए। सकारात्मक डीएनए रिपोर्ट प्रस्तुत की। शासन की ओर से पक्ष विशेष लोक अभियोजक मनोज जाट ने रखा। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी 2-4 एवं सकारात्मक डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपित को दोषी पाया।

विशेष न्यायाधीश ने फैसले में बयां की मार्मिक दास्तां
- 2 से 3 जनवरी की थी वो दरमियानी रात, जब कोई नहीं था मेरे साथ।
- इठलाती, नाचती छह साल की परी थी, मैं अपने मम्मी-पापा की लाड़ली थी।
- सुला दिया था उस रात बड़े प्यार से मां ने मुझे घर पर, पता नहीं था नींद में मुझे ले जाएगा। “वो” मौत का साया बनकर।
- जब नींद से जागी, तो बहुत अकेली और डरी थी मैं, सिसकियों ले लेकर मम्मी-पापा को याद बहुत करी थी मैं।
- न जाने क्या-क्या किया मेरे
साथ, मैं चीखती थी, चिल्लाती थी, लेकिन किसी ने न सुनी मेरी आवाज।
- थी गुडियों से खेलने की उम्र मेरी, पर उसने मुझे खिलौनी बना दिया।
- ‘वो’ भी तो था तीन बच्चो का पिता, फिर मुझे क्यों किया अपनों से जुदा।
- खेल खेलकर मुझे तोड़ दिया, फिर मेरा मुंह दबाकर, मरता हुआ झाड़ियों में छोड़ दिया।
- हां मैं हूं निर्भया, हां फिर एक निर्भया, एक छोटा सा प्रश्न उठा रही हूं।
- जो नारी का अपमान करे, क्या वो मर्द हो सकता है, क्या जो इंसाफ निर्भया को मिला, वह मुझे भी मिल सकता है…।
विशेष लोक अभियोजक ने बहस में पेश कीं ये पंक्तियां
- वो छोटी सी बच्ची थी, ढंग से बोल ना पाती थी। देख के जिसकी मासूमियत, उदासी मुस्कान बन जाती थी।
- जिसने जीवन के केवल, पांच बसंत ही देखे थे। उसपे ये अन्याय हुआ, ये कैसे विधि के लेखे थे।
- एक छह साल की बच्ची पे, ये कैसा अत्याचार हुआ। एक बच्ची को बचा सके ना, कैसा मुल्क लाचार हुआ।
- उस बच्ची पे जुल्म हुआ, वो कितनी रोई होगी। मेरा कलेजा फट जाता है, तो मां कैसे सोयी होगी।
- जिस मासूम को देखके मन में, प्यार उमड़ के आता है। देख उसी को मन में कुछ के, हैवान उतर क्यों आता है।
- कपड़ों के कारण होते रेप, जो कहे उन्हें बतलाऊ मैं। आखिर छह साल की बच्ची को, साड़ी कैसे पहनाऊं मैं।
- अगर अब भी हम ना सुधरे तो, एक दिन ऐसा आएगा। इस देश को बेटी देने में, भगवान भी जब घबराएगा।







