सीमा सिंह शहडोल -: Repo Rate Cut: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक सोमवार को शुरू हुई थी। बुधवार सुबह आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसलों की जानकारी दी। ट्रंप के टैरिफ के बीच एमपीसी के फैसले पर सभी की नजर थी।
- पिछली बार फरवरी 2025 में घटी थी रेपो रेट
- मई 2020 के बाद पहली कटौती थी
- रेपो रेट से तय होती है लोन की ब्याज दर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति का एलान कर दिया। उन्होंने बताया कि एमपीसी की बैठक (RBI MPC Meeting) में एक बार फिर रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती (Repo Rate Cut) का फैसला लिया गया है। इससे आम आदमी को सस्ते लोन के रूप में राहत मिलेगी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को तत्काल प्रभाव से 25 आधार अंकों से घटाकर 6% करने का फैसला किया है।
इससे पहले फरवरी में एमपीसी ने रेपो दर को 25 आधार अंकों से घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया था। तब यह मई 2020 के बाद पहली कटौती और ढाई साल के बाद पहला संशोधन था।
#WATCH | Mumbai | RBI Governor Sanjay Malhotra says, ” The MPC (Monetary Policy Committee) voted unanimously to reduce the policy repo rate by 25 basis points to 6 % per cent with immediate effect.”
(Source: RBI) pic.twitter.com/rRVCJiTy0H
— ANI (@ANI) April 9, 2025
एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में जताई गई उम्मीद
मौद्रिक नीति के ऐलान से पहले एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई थी कि आरबीआई रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है, जिससे यह छह प्रतिशत हो जाएगी।
रिपोर्ट में आगे लिखा गया था, हमारा मानना है कि आरबीआई अपने विकास और मुद्रास्फीति के पूर्वानुमानों को कम कर सकता है। अप्रैल में कटौती के बाद हमें जून और अगस्त की बैठक में भी 25-25 आधार अंकों की और कटौती की उम्मीद है। इससे रेपो दर 5.5 प्रतिशत हो जाएगी और यह हमारा तटस्थ अनुमान है।
ट्रम्प के टैरिफ का असर…
गोल्डमैन सैक्स को भी रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद थी। रियल एस्टेट डेवलपर संजीवनी ग्रुप के चेयरमैन और संस्थापक उमेश गौड़ा एचए ने कहा था कि वैश्विक विकास पर ट्रंप टैरिफ का प्रभाव महसूस किया जाएगा, क्योंकि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार धीमा हो रहा है, जिससे वैश्विक विकास प्रभावित हो रहा है।
गौड़ा ने कहा था, ‘चूंकि भारत की मुद्रास्फीति में गिरावट आ रही है, इसलिए आरबीआई को निवेश को बढ़ावा देने के लिए दरों में 50 आधार अंकों की कटौती करनी चाहिए ताकि व्यवसाय पूंजीगत व्यय में निवेश कर सकें और वैश्विक मांग को पूरा कर सकें। घरेलू मोर्चे पर, दरों में कमी से सभी क्षेत्रों में उपभोक्ता मांग बढ़ेगी और वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने में मदद मिलेगी।’







