सीमा सिंह शहडोल – 22 फरवरी को एमपी के शिवपुरी में 5 साल की बच्ची से पड़ोसी ने रेप किया, प्राइवेट पार्ट को दांतों से काटा और सिर दीवार पर पटक दिया। आरोपी की उम्र 17 साल है।
21 फरवरी को झारखंड के खूंटी जिले में शादी से लौट रही 3 नाबालिग लड़कियों के साथ 18 लड़कों ने गैंगरेप किया। सभी आरोपियों की उम्र 13 से 17 साल के बीच है। राजधानी दिल्ली में भी फरवरी महीने में 3 वीभत्स मर्डर हुए, जिनमें आरोपी नाबालिग हैं।
आखिर इतने हिंसक और घिनौने क्यों हो रहे हैं नाबालिग, क्या हैं इसकी वजहें और समाधान; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी…
केस-1
एमपी में 5 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी
तारीख: 22 फरवरी 2025
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के एक गांव में 5 साल की बच्ची अपने घर की छत पर खेल रही थी। 17 साल का पड़ोसी लड़का शराब के नशे में बच्ची को पास के एक खाली मकान में ले गया।
यहां उसने बच्ची के साथ रेप किया। कई बार उसे दीवार पर पटका और उसके चेहरे से लेकर प्राइवेट पार्ट्स तक को कई जगह दांतों से काटाI
लहूलुहान हालत में मिली बच्ची को ICU में एडमिट किया गया। उसके प्राइवेट पार्ट्स पर 28 टांके लगाने पड़े। बच्ची होश में आने के बाद भी कुछ बोल नहीं पा रही है।
पुलिस का एक्शनः आरोपी लड़के को गिरफ्तार करके नाबालिग के तौर पर मुकदमा चलाया जा रहा है।
केस-2
झारखंड में 18 नाबालिगों ने मिलकर गैंगरेप किया
तारीख: 21 फरवरी 2025
रांची से सटे खूंटी जिले के एक गांव में लोटा पानी (सगाई) के कार्यक्रम में शामिल हुई 5 लड़कियां रात करीब 10 बजे अपने गांव लौट रही थीं।नदी पार करने के दौरान 18 लड़कों ने लड़कियों को जबरन पास के जंगल की तरफ ले जाने की कोशिश की। दो लड़कियां किसी तरह बच निकलीं, बाकी 3 लड़कियों के साथ लड़कों ने गैंगरेप किया।
पुलिस का एक्शनः पुलिस ने बीएनएस की कई धाराओं सहित पोक्सो एक्ट में मामला दर्ज कर 13 साल से 17 साल उम्र के सभी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया है। पूछताछ में सभी लड़कों ने दुष्कर्म की बात कबूल कर ली है।
केस-3
दिल्ली में 5 नाबालिगों ने डेढ़ घंटे में दो हत्याएं कीं
तारीख: 19 फरवरी 2025
पहला पूर्वी दिल्ली में गाजीपुर पेपर मार्केट के आसपास रहने वाले आरोपियों में से एक का जन्मदिन था। लड़कों ने रात करीब 10:30 बजे मार्केट में शराब पीकर उत्पात मचाया और अंडे बेचने वाले 49 साल के रमेश दाताराम के रोकने पर उनकी चाकू घोंपकर हत्या कर दी।
दूसरी हत्या: शव छोड़कर लड़के शराब पीते हुए दल्लूपुरा रोड पर जल बोर्ड के ट्रीटमेंट प्लांट के पास पहुंचे। करीब 12 बजे ग्राफिक डिजाइन कंपनी में हेल्पर 30 साल के पप्पू प्रसाद को लूटने की कोशिश की और चाकू घोंपकर हत्या कर दी।
पुलिस का एक्शन: 14 से 17 साल उम्र के इनलड़कों को गिरफ्तार करके नाबालिग के तौर पर मुकदमा चलाया जा रहा है।
हर साल 11 हजार से ज्यादा बड़े अपराध करते हैं नाबालिग
2022 में नाबालिगों द्वारा क्राइम के सबसे ज्यादा 4,406 मामले महाराष्ट्र के हैं। उसके बाद मध्य प्रदेश में 3,795, फिर राजस्थान में 3,063 अपराध किशोरों ने किए हैं।
24 अप्रैल 2024 को मध्य प्रदेश के रीवा में एक 13 साल के लड़के ने मोबाइल पर अश्लील वीडियो देखा, उसके बाद 9 साल की बहन का रेप किया।
जनवरी 2025 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में ‘बीके कंपनी’ नाम के एक गिरोह के 2 नाबालिगों सहित 7 लोगों ने विठ्ठल सुभाष शिंदे नाम के एक नाबालिग की हत्या करके उसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
26 फरवरी 2025 को चेन्नई में 6 नकाबपोश लड़कों ने 28 साल के एक हिस्ट्रीशीटर का मर्डर कर दिया और सोशल मीडिया पर लिखा- रॉबर्ट 100% मर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील आशीष कुमार पांडेय के मुताबिक ऑनलाइन अश्लील कंटेंट बार-बार देखने से किशोरों को ये नॉर्मल लगने लगता है और वह खुद किसी न किसी तरह का यौन अपराध करने लगते हैं।
सोशल मीडिया पर गैंग कल्चर बढ़ा है। नाबालिग शेखी बघारने के लिए अपराध और गैंगवॉर से जुड़ा कंटेंट शेयर करते हैं। चैलेंज वीडियोज देखकर बच्चे खतरनाक और गैरकानूनी काम करते हैं।
बेरोजगारी अवसाद, पीयर प्रेशर भी बड़ा फैक्टर
अमेरिकी समाजशास्त्री रॉबर्ट मार्टिन की स्ट्रेन थ्योरी के मुताबिक, जब बच्चों को अपना मनपसंद गोल या कोई चीज नहीं मिलती तो मनोवैज्ञानिक दबाव, गुस्से, झुंझलाहट में अपराध करते हैं।
दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल में सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. रोमा कुमार के मुताबिक, 6 मानसिक कारणों से बच्चे अपराध की तरफ जाते हैं…
1. पीयर प्रेशरः आपराधिक प्रवृत्ति के दोस्तों के दबाव में या दूसरों की तरह अपनी पहचान बनाने, महंगी चीजों और अच्छी लाइफस्टाइल के लिए किशोर अपराध करते हैं।
2. बेरोजगारी: नौकरी न मिलने के चलते मानसिक रूप से परेशान होकर चोरी, लूट जैसे अपराध करते हैंI
3. समाज में असुरक्षा: गैंगवार, दंगे और अपराध देखते हैं, इससे असुरक्षा और अपराध प्रवृत्ति बढ़ती है।
4. सामाजिक भेदभाव: कई बार भेदभाव और बेइज्जती से उपजने वाला गुस्सा उन्हें अपराधी बना सकता है।
5. बचपन में हिंसा: कम उम्र में झेली हिंसा से उपजे कंट्रोल और पावर दिखाने जैसे साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर अपराध की तरफ ले जाते हैं।
6. मानसिक अवसाद: इसमें बच्चे बिना परिणामजाने अपराध करते हैं। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के मुताबिक, पकड़े गए 70% किशोरों को किए अपराध का नतीजा नहीं पता था।
गरीबी और नशा भी किशोरों को बनाता है अपराधी
बेघर नाबालिग अपराधी सबसे कम है
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में गिरफ्तार किए गए 37,780 नाबालिग आरोपियों में से 32,430 परिवार के साथ रहते थे। सिर्फ 1848 नाबालिग बेघर थे।
डॉ. रोमा कुमार कहती हैं,
‘नैतिक मूल्यों में गिरावट, माता- पिता के तलाक, घरेलू हिंसा का बच्चों पर फर्क पड़ता है। छोटी गलती पर सख्त सजा देने से बच्चे हिंसक हो जाते हैं।
गरीब घरों से निकले सबसे ज्यादा नाबालिग अपराधी
दिसंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि गरीबी और नाबालिगों के अपराध करने में सीधा संबंध है।
उन्होंने NCRB के हवाले से बताया कि 2015 में 42.39% नाबालिग आरोपी 25,000 रुपए महीने की आय वाले परिवारों से थे। केवल 2.30% नाबालिग 2 से 3 लाख रुपए के बीच कमाई वाले परिवारों से थे।
ड्रग्स और नशे का अपराध से सीधा कनेक्शन
हरियाणा पुलिस की एक स्टडी के मुताबिक, नशा करने वाले नाबालिग ज्यादा अपराध करते हैं। इस स्टडी में गांजा और भांग जैसा नशा करने वाले नाबालिग अपराधियों का संबंध हत्या से, सूंघने वाला नशा करने वालों का संबंध रेप से और अफीम जैसा नशा करने वालों का संबंध चोरी और चेन स्नेचिंग जैसे अपराधों से था।
सिर्फ सेक्स नहीं कंट्रोल दिखाने के लिए रेप
मनोचिकित्सक डॉ. वैभव चतुर्वेदी कहते हैं, ‘यौन इच्छा के बजाय पावर और कंट्रोल रेप की प्राइमरी वजहें हैं। शराब और नशीली दवाएं हिचक कम कर देती हैं और अपराध की टेंडेंसी बढ़ जाती है।
बलात्कारी का मुख्य उद्देश्य अपनी ताकत दिखाना होता है, रेपिस्ट के लिए महिला की उम्र मायने नहीं रखती।
वहीं मनोचिकित्सक डॉ. प्रीतेश गौतम भी कहते हैं, ‘बलात्कारी सिर्फ सेक्स नहीं चाहते, बल्कि वे अपनी सत्ता, नियंत्रण और हिंसा का आनंद लेना चाहते हैं।
प्रीतेश गौतम के मुताबिक, कुछ अपराधियों को तो खून देखकर संतुष्टि मिलती है। नवंबर 2023 में 16 साल के लड़के ने एक व्यक्ति की 60 बार चाकू घोंपकर हत्या की, उसके 350 रुपए लूटे और लाश के पास नाचा।
डॉ. वैभव और डॉ. प्रीतेश कहते हैंकि बलात्कारी को अजनबी या किसी रिलेटिव पर हमला करना एक जैसा लगता है। वह पीड़ित को रिश्तेदार के बजाय अपना प्रभुत्व दिखाने की चीज की तरह देखते हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अपराधी छेड़छाड़ जैसी कम गंभीर यौन हिंसा से शुरुआत करता है। इसे रोका न जाए तो अपराध बड़ा होता जाता है।
क्या किशोरों में कानून का खौफ नहीं?
NCRB की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 तक कुल गिरफ्तार 78,443 किशोरों में से 40,663 नाबालिगों के मामले पिछले साल के पेंडिंग थे, 37780 किशोर 2022 में पकड़े गए, जबकि 2022 में सिर्फ 704 नाबालिगों को सजा हुई।
2015 में सरकार ने जस्टिस जुवेनाइल एक्ट बनाया। इसमें 16 से 18 की उम्र में जघन्य अपराध करने पर वयस्क की तरह मामला चलाया जा सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील आशीष पांडेय के मुताबिक, इसमें 4 खामियां हैं
एक्ट के तहत 7 साल या ज्यादा सजा वाले अपराध के लिए 16 से 18 साल के नाबालिग पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन हत्या के प्रयास जैसे क्राइम, जिनमें न्यूनतम सजा 7 साल से कम है, उन पर यह एक्ट लागू नहीं होता।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा किसी नाबालिग की मानसिक-शारीरिक स्थिति देखकर ये तय करने का कोई साइंटिफिक तरीका या गाइडलाइंस नहीं हैं कि उस पर वयस्क के बतौर मुकदमा चलाया जाए या नहीं।
एक्ट के तहत वयस्क की तरह मुकदमा चलने के बावजूद फांसी या उम्रकैद की सजा नहीं दी जा सकती। सुधार गृह में सजा काटने के बाद बिना किसी निगरानी के रिहा कर दिया जाता है, जिससे नाबालिग दोबारा अपराध करते हैं।
नाबालिगों के मामले में सरकार की कोशिशों में कई लूपहोल
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत बच्चों की दो कैटेगरी हैं-
1. ऐसे बच्चे जिनको देखभाल और सुरक्षा की जरूरत है। इनके लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और चिल्ड्रेन केयर होम बनाए गए हैं।
2. ऐसे बच्चे जो किसी कानूनी मामले में आरोपी हैं। इनके लिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड और स्पेशल होम बनाए गए हैं।
बाहर निकलने के बाद देखभाल के लिए आफ्टर केयर ऑर्गनाइजेशन बनाए गए हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स सरकार की इन कोशिशों में कई खामियां बताते हैं।
पुलिस कई मामलों में बच्चों को नियम के खिलाफ पकड़ती है। 18 साल से कम उम्र में पकड़े गए कई बच्चों को लंबे समय तक जमानत नहीं मिलती।
16 साल से कम उम्र के जघन्य अपराधों के आरोपी बच्चों को केयर होम में रखा जाता है, जो दूसरे बच्चों के लिए ठीक नहीं है।
लड़कियों को स्पेशल होम में भी खास सिक्योरिटी की जरूरत होती है, वरना उनका शोषण किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं भारत के कानूनों को दुरुस्त करने के लिए बच्चों की सुरक्षा से जुड़े संयुक्त राष्ट्र संघ के कनवेंशन और यूरोप के देशों के कानून से सबक लिए जा सकते हैं।
नाबालिगों को अपराध से दूर करने के लिए क्या जरूरी?
सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. रोमा के मुताबिक स्कूल में सेक्स एजुकेशन को अनिवार्य कर देना चाहिए।
पोर्नोग्राफी, अश्लील ऑनलाइन कंटेंट पर पूरी तरह रोक लगानी चाहिए।
नशा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
बच्चों को मॉरल एजुकेशन देनी चाहिए।
बच्चों की मेंटल हेल्थ पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट आशीष कुमार पांडेय कहते हैं,
जस्टिस जुवेनाइल एक्ट की धारा 15 में संशोधन करके इसमें जघन्य अपराधों के साथ ही गंभीर अपराधों को भी शामिल किया जाए।
हालांकि डॉ. रोमा के मुताबिक, सख्त सजा के बजाय अपराधी नाबालिगों को गाइडेंस और निगरानी की जरूरत है, वरना वह दोबारा अपराध कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं,
डिजिटल दुनिया में बच्चे, किशोर और वयस्क का फर्क खत्म हो गया है। बच्चों के बालिग होने की उम्र को लेकर संसद और अदालतों तक में असमंजस है। इसलिए जमीनी हकीकत के अनुसार कानून बनाने की जरूरत है।







