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Supreme Court: बुलडोजर कार्रवाई मामले में अदालत की अवमानना का आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय जाने को कहा…….

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Supreme Court . 07 Feb 2025 . Saniya Ansari

सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2024 को दिए अपने आदेश में बिना पूर्व नोटिस और सुनवाई का मौका दिए बगैर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश प्राधिकरण द्वारा अदालत के आदेश की अवमानना की गई।
Powers and functions of the Supreme Court - iPleaders
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संभल के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को संबंधित उच्च न्यायालय में जाने को कहा। दरअसल याचिका में दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल दिए अपने आदेश में बिना पूर्व नोटिस और सुनवाई का मौका दिए बगैर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि संभल में प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा अदालत के आदेश की अवमानना की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय जाने को कहा

याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा है कि 13 नवंबर 2024  को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में बुलडोजर से तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। अदालत के आदेश के बावजूद 10-11 जनवरी 2025 को संभल स्थित उसकी संपत्ति में बिना किसी पूर्व सूचना और उसका पक्ष सुने बगैर तोड़फोड़ की गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह अदालत के बीते साल नवंबर में दिए गए आदेश की अवमानना है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाने को कहा। अदालत ने कहा कि 13 नवंबर, 2024 के अपने फैसले में उसने स्वतंत्रता दी थी कि यदि कोई उल्लंघन हुआ है, तो क्षेत्राधिकार वाला उच्च न्यायालय शिकायत पर विचार करने का हकदार होगा।

याचिकाकर्ता का आरोप- बगैर नोटिस की गई तोड़फोड़

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद गयूर की तरफ से पेश हुए वकील चांद कुरैशी से कहा कि ‘वे याचिका उच्च न्यायालय में दायर करें। यह मामला उच्च न्यायालय द्वारा बेहतर तरीके से निपटाया जा सकता है।’ याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में एकतरफा बुलडोजर से तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाई थी और 15 दिन पहले नोटिस जारी करने का आदेश दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन नहीं किया गया और संभल में स्थित उसकी संपत्ति में बिना किसी पूर्व नोटिस के तोड़फोड़ की गई।

उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत ने अपने नवंबर 2024 के फैसले में स्पष्ट किया कि वे सार्वजनिक स्थानों जैसे कि सड़कों, गलियों, फुटपाथों, रेलवे लाइनों या नदी या जल निकायों में अनधिकृत संरचनाओं को छोड़कर किसी की संपत्ति में तोड़फोड़ से पूर्व नोटिस देने का आदेश दिया था।

Shreya News
Author: Shreya News

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