Delhi . 14 Nov 2024 . Saniya Ansari
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के महापौर और उप महापौर पद के लिए गुरुवार को चुनाव है। सात महीने देरी से हो रहे चुनाव के लिए आप और भाजपा दोनों ने उम्मीदवार उतारे हैं। एमसीडी में फिलहाल आप का बहुमत है। आइये जानते हैं दिल्ली में मेयर चुनाव कैसे होता है?
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के महापौर और उप महापौर पद के लिए आज चुनाव है। भाजपा पार्षद और पूर्वी दिल्ली के पूर्व मेयर सत्य शर्मा को चुनाव के लिए पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने हैं। एमसीडी में बहुमत के साथ जहां आप अपनी जीत के लिए आश्वस्त है तो वहीं अल्पमत वाली भाजपा ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
दिल्ली नगर निगम का गठन 1958 में हुआ था। इसे दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत बनाया गया था और इसमें शुरू में 80 पार्षद थे। समय के साथ निगम का विस्तार हुआ और इसमें 272 पार्षद हो गए। दिल्ली में 2012 तक एकीकृत एमसीडी थी लेकिन बढ़ती आबादी के हिसाब से परिसीमन की प्रक्रिया जरिए दिल्ली को छोटी इकाइयों में बांट दिया गया। एकीकृत एमसीडी को उत्तरी दिल्ली नगर निगम, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में बांट दिया गया। तीन भागों में बंटी एमसीडी करीब 10 वर्षों तक चलती रही और मई 2022 में तीनों निकायों को एक बार फिर एकीकृत कर दिया गया। केंद्र ने परिसीमन आदेश जारी करके वार्डों की संख्या 272 से घटाकर 250 कर दी।
दिल्ली नगर निगम का मुखिया महापौर होता है और उनके नीचे उप महापौर काम करते हैं। निर्वाचित महापौर एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करता है और मुख्य रूप से औपचारिक शक्तियां रखता है, जबकि प्रशासनिक जिम्मेदारियां एमसीडी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार की होती हैं। एमसीडी अधिनियम के अनुसार एमसीडी को हर पांच साल में चुनाव कराना होता है और हर साल वित्तीय वर्ष की शुरुआत में पहली बैठक में महापौर का चुनाव करना होगा।
एमसीडी के चुनाव में आरक्षण भी लागू होता है। अधिनियम के अनुसार एमसीडी को अपने पहले साल में एक महिला को महापौर बनाना होता है और इसके चलते ही 2023 में आप की शैली ओबेरॉय मेयर चुनी गई थीं। पहला वर्ष महिलाओं के लिए, दूसरा वर्ष अनारक्षित वर्ग के लिए, तीसरा वर्ष आरक्षित वर्ग के लिए तथा अंतिम दो वर्ष पुनः अनारक्षित वर्ग के लिए हैं। तीसरे साल में अनुसूचित जाति से एक निर्वाचित पार्षद का चुनाव करना होता है इसलिए इस बार एक एससी उम्मीदवार का चुनाव किया जाएगा।
यह चुनाव एमसीडी के गठन के बाद इसकी पहली बैठक के दौरान आयोजित किया जाता है, जिसमें गुप्त मतदान के जरिए मतदान होता है। मेयर का चुनाव न केवल मतदाताओं द्वारा सीधे तौर पर किया जाता है, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की भी इस प्रक्रिया में भागीदारी होती है। इन प्रतिनिधियों में न केवल नव-निर्वाचित पार्षद शामिल होते हैं, बल्कि एक पूरा कॉलेज भी शामिल होता है जो मेयर का चुनाव करता है। इस चुनाव की प्रक्रिया में एमसीडी पार्षद, दिल्ली विधानसभा के सदस्य और दिल्ली के सांसद शामिल होते हैं। इस चुनाव में कुल 273 सदस्य मतदान में हिस्सा लेंगे। इनमें 249 एमसीडी पार्षद, 14 मनोनीत विधायक और लोकसभा व राज्यसभा के 10 सांसद शामिल हैं। जीत के लिए 137 मतों की जरूरत होगी। मनोनीत पार्षद (इन्हें एल्डरमैन कहते हैं) भले ही एमसीडी का हिस्सा होते हैं, लेकिन महापौर चुनाव में उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होता।
सबसे अधिक वोट पाने वाले उम्मीदवार को मेयर घोषित किया जाता है। बराबरी की स्थिति में, चुनाव की देखरेख के लिए नियुक्त विशेष आयुक्त लॉटरी का विशेष ड्रा आयोजित करता है और जिस उम्मीदवार का नाम निकलता है उसे मेयर घोषित किया जाता है।

एमसीडी के मेयर व डिप्टी मेयर पद के लिए गुरुवार को चुनाव है। एमसीडी में आम आदमी पार्टी के पास बहुमत होने के कारण वह जीत के दावे कर रहे हैं। बावजूद इसके, भाजपा भी मैदान में अपनी किस्मत आजमाने को तैयार है। मेयर चुनाव के लिए 273 सदस्य मतदान करेंगे इनमें 249 पार्षद, 14 मनोनीत विधायक और लोकसभा व राज्यसभा के 10 सांसद मतदान में शामिल हैं। इस चुनावी गणित में आम आदमी पार्टी के पास 143 मत हैं, जबकि भाजपा के पास 122 मत हैं और कांग्रेस के पास आठ मत हैं। जीत के लिए 137 मतों की जरूरत होगी।
2022 में हुए एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सबसे ज्यादा 134 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा के 104 पार्षद ही चुने गए थे। नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 126 था।
महापौर पद के लिए आप ने देवनगर से पार्षद महेश खिंची को महापौर पद का उम्मीदवार बनाया है, जबकि अमन विहार से पार्षद रविंदर भारद्वाज को उप महापौर पद के लिए उम्मीदवार बनाया है। वहीं, भाजपा ने महापौर पद के लिए शकूरपुर से किशन लाल और उप महापौर पद के लिए सदातपुर से नीता बिष्ट को प्रत्याशी बनाया है।
आप और भाजपा के बीच लंबे समय से चल रहे राजनीतिक गतिरोध के कारण सात महीने तक टलने के बाद आज यानी 14 नवंबर को एमसीडी के मेयर चुनाव हो रहे हैं। गतिरोध के चलते एमसीडी सत्र में बार-बार व्यवधान उत्पन्न हुआ, जिसके कारण इस साल अप्रैल में होने वाले चुनाव स्थगित कर दिए गए।
तीसरे साल में महापौर पद का कार्यकाल प्रक्रियागत विवादों के कारण विलंबित हो गया, जिसमें पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति पर असहमति भी शामिल थी। हालांकि, इन विलंबों के कारण नवनिर्वाचित महापौर और उप महापौर का कार्यकाल छोटा हो गया है और वे केवल पांच महीने का ही कार्यकाल पूरा कर सकेंगे।







