श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- जबलपुर। ओबीसी और सुप्रीम कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस वर्ग के उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत शत-प्रतिशत फीस प्रतिपूर्ति नहीं किए जाने के मामले में मध्य प्रदेश शासन से जवाब मांगा है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण आयुक्त को नोटिस
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार, मप्र शासन और भोपाल स्थित पिछड़ा वर्ग कल्याण आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला खरगोन निवासी डा. दिनेश चंद्र पाटीदार का है।
तीन वर्षीय एमडीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था
उन्होंने बीडीएस के बाद वर्ष 2014 में अंबाला, हरियाणा के डेंटल काॅलेज में तीन वर्षीय एमडीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। योजना के अनुसार दूसरे राज्य में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति गृह राज्य द्वारा की जानी थी, जिसका पुनर्भुगतान केंद्र सरकार करती है।
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया
डाॅ. पाटीदार ने काॅलेज में सात लाख रुपये प्रतिवर्ष फीस जमा की, लेकिन मप्र सरकार के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने तीन वर्षों में 21 लाख रुपये के बजाय केवल 84,380 रुपये छात्रवृत्ति के रूप में दिए। उन्होंने हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी, लेकिन याचिका खारिज हो गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट आदित्य संघी ने तर्क दिया कि केंद्र प्रायोजित योजना के तहत पात्र छात्रों को पूरी फीस प्रतिपूर्ति का प्रविधान है। राज्य सरकार फंड की कमी का हवाला देकर राशि नहीं रोक सकती। नोटिस के बाद प्रदेश के हजारों प्रभावित मेडिकल और डेंटल विद्यार्थियों को राहत की उम्मीद जगी है।











