श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- उमरिया जिले में करीब 200 नल-जल योजनाओं का लगभग 4 करोड़ रुपये बिजली बिल बकाया है। भुगतान नहीं होने से कुछ कनेक्शन काटे जाने की बात सामने आई है। पीएचई ने जिम्मेदारी पंचायतों की बताई, जबकि जिला पंचायत सीईओ ने मामले में एमपीईवी से चर्चा करने की बात कही।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी एच.एस. धुर्वे ने बताया कि सरकार विभाग को नल-जल योजनाओं के निर्माण की जिम्मेदारी देती है। निर्माण पूरा होने के बाद विभाग कुछ दिनों तक ट्रायल के रूप में योजना का संचालन करता है और इसके बाद उसे ग्राम पंचायत के हवाले कर दिया जाता है। पंचायत को योजना सौंपे जाने के बाद उसके रखरखाव और बिजली बिल सहित अन्य खर्चों का भुगतान पंचायत की जिम्मेदारी होती है।
इधर, करीब 4 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया होने की जानकारी ने पंचायतों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं होने पर बिजली कंपनी की ओर से कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। इसका सीधा असर उन ग्रामीणों पर पड़ेगा, जिनके घरों तक पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर ये योजनाएं तैयार की गई हैं।
हालांकि, नल-जल योजनाओं के बिजली कनेक्शन काटे जाने के मामले में जिला पंचायत प्रशासन के पास अब तक किसी पंचायत की ओर से आधिकारिक जानकारी नहीं पहुंची है। जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह ने कहा कि उनके पास अभी तक किसी भी पंचायत से नल-जल योजना का बिजली कनेक्शन काटे जाने की सूचना नहीं आई है। यदि किसी स्थान पर ऐसा हुआ है तो इस संबंध में मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से चर्चा की जाएगी।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि बिजली बिल का बकाया लगातार बढ़ता रहा और पंचायतों ने समय पर भुगतान नहीं किया तो आने वाले दिनों में इन योजनाओं का संचालन प्रभावित हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजना केवल सरकारी व्यवस्था नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी है।
बिजली कनेक्शन कटने की स्थिति में पानी की मोटरें बंद हो सकती हैं और पूरी जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को फिर से हैंडपंप, कुएं और अन्य जलस्रोतों पर निर्भर होना पड़ सकता है।
नल-जल योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को पानी के लिए भटकने से बचाना था। लेकिन बिजली बिल के भुगतान में लापरवाही के कारण यदि योजनाओं का संचालन प्रभावित होता है तो करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई इस व्यवस्था का लाभ अधूरा रह सकता है। जरूरत है कि संबंधित पंचायतें बकाया राशि के भुगतान और योजनाओं के नियमित संचालन को लेकर गंभीरता दिखाएं, ताकि ग्रामीणों को पानी के लिए दोबारा पुराने जलस्रोतों पर निर्भर न होना पड़े।











