श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोल का विचारपुर गांव फुटबॉल के जुनून से अपनी अलग पहचान बना चुका है। “मिनी ब्राजील” के नाम से मशहूर यह गांव बच्चों और युवाओं के फुटबॉल के प्रति समर्पण और बड़े सपनों का केंद्र बन गया है, जहां हर दिन मैदान में भविष्य के सितारे तैयार हो रहे हैं।
जहां देश के अधिकांश हिस्सों में क्रिकेट का खुमार सिर चढ़कर बोलता है, वहीं शहडोल का एक छोटा सा गांव फुटबॉल के सपनों को आकार दे रहा है। यहां बच्चे खिलौनों से ज्यादा फुटबॉल को पसंद करते हैं और युवाओं की ख्वाहिश सिर्फ मैच देखने तक सीमित नहीं, बल्कि एक दिन भारतीय टीम की जर्सी पहनकर फीफा विश्व कप के मैदान में उतरने की है।
फुटबॉल बना गांव की पहचान
शहडोल जिले का विचारपुर गांव आज पूरे प्रदेश में मिनी ब्राजील के नाम से पहचान बना चुका है। गांव की पहचान केवल फुटबॉल खेलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां खेल एक परंपरा का रूप ले चुका है। कई दशकों से गांव की पीढ़ियां फुटबॉल से जुड़ी रही हैं और लगभग हर परिवार का कोई न कोई सदस्य राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर इस खेल में अपनी प्रतिभा दिखा चुका है।
गांव में सुबह की शुरुआत ही फुटबॉल के साथ होती है। सूरज निकलते ही बच्चे और युवा मैदानों में पहुंच जाते हैं। कच्चे मैदानों पर घंटों अभ्यास करते ये खिलाड़ी बड़े सपने संजोए हुए हैं। उनके लिए फुटबॉल सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि भविष्य की राह है। युवाओं का कहना है कि वे एक दिन भारत को फीफा विश्व कप में खेलते देखना चाहते हैं और खुद उस सफर का हिस्सा बनना चाहते हैं।
संसाधन कम, हौसले बुलंद
फीफा तक पहुंचने का सपना
सानिया कुंडे कहती हैं कि हम लोग बहुत मेहनत कर रहे हैं। आज हम फीफा देखकर सीख रहे हैं, लेकिन हमारा सपना है कि एक दिन भारत भी फीफा वर्ल्ड कप में उतरे और दुनिया हमारे खिलाड़ियों को भी उसी तरह देखे, जैसे हम आज बड़े खिलाड़ियों को देखते हैं। वहीं, कोच लक्ष्मी का कहना है कि मैं बच्चों को ट्रेंड कर रही हूं, यहां के बच्चे भी फीफा खेले।







