श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- रीवा। देश के बहुचर्चित नीट परीक्षा पेपर लीक कांड पर भले ही जांच एजेंसियां कार्रवाई कर रही हों, लेकिन इस कथित शिक्षा माफिया के खेल की कीमत अब प्रतिभाशाली छात्रों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। मऊगंज जिले की नईगढ़ी जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम मगनिया की रहने वाली समीक्षा चतुर्वेदी की मौत ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है।
सामान्य किसान परिवार की बेटी
समीक्षा एक सामान्य किसान परिवार की बेटी थी। उसके पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी सीमित संसाधनों वाले किसान हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। बेहतर शिक्षा और भविष्य की तलाश में वे परिवार सहित नागपुर चले गए, जहां उन्होंने भोजन बनाने का कार्य शुरू किया। बताया जाता है कि हृदय रोगी होने तथा बाईपास सर्जरी होने के बावजूद कृष्ण कुमार प्रतिदिन 18 घंटे तक मेहनत करते थे, ताकि उनकी बेटी डॉक्टर बन सके।
बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना
परिजनों के अनुसार समीक्षा बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। पिता की मेहनत और संघर्ष को देखते हुए वह दिन-रात पढ़ाई करती रही। नीट परीक्षा के लिए उसने कठिन परिश्रम किया और परीक्षा देकर लौटने के बाद अपने पिता के गले लगकर कहा था कि, “पापा, आपकी बेटी अब डॉक्टर बनेगी, मेरा पेपर बहुत अच्छा गया है।”
गहरे मानसिक आघात में
लेकिन कुछ ही समय बाद जब नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक की खबरें सामने आईं तो समीक्षा गहरे मानसिक आघात में चली गई। परिजनों का कहना है कि उसे लगने लगा कि उसकी मेहनत और प्रतिभा के साथ अन्याय हुआ है। इसी निराशा और हताशा के बीच उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
अगस्त क्रांति मंच के संयोजक कुंज बिहारी तिवारी ने परिजनों से मुलाकात कर घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह केवल आत्महत्या का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और पेपर लीक माफिया द्वारा की गई प्रतिभा की हत्या है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र की वर्षों की मेहनत को कुछ लोगों के लालच और भ्रष्टाचार के कारण नष्ट कर दिया जाता है, तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों को हत्या के समान अपराध का दोषी माना जाना चाहिए। उन्होंने मामले में न्यायिक लड़ाई लड़ने तथा दोषियों को कठोर सजा दिलाने की बात कही।
किताब में मिला सुसाइड नोट, जांच कर रही पुलिस
- स्वजन के अनुसार, परीक्षा निरस्त होने के एक सप्ताह बाद 20 मई को परिवार के सभी लोग दोपहर के भोजन के लिए बैठे तो आकांक्षा ने कहा कि उसे भूख नहीं है।
- इसके बाद वह अपने कमरे में चली गई। लगभग तीन बजे परिवार ने उसका शव कमरे के अंदर लटका पाया, लेकिन उस समय कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था।
- ऐसे में, सदमे में आए स्वजन तब आत्महत्या के कारण को समझ नहीं पाए थे। कुछ दिन बाद जब स्वजन आकांक्षा की किताबों और अध्ययन सामग्री को देख रहे थे, तो उन्हें एक किताब में उसका हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला। इसे उन्होंने एक जून को नागपुर के अंबाझरी थाना पुलिस को दिया।
- पुलिस उपायुक्त नित्यानंद झा ने बताया कि आकांक्षा के सुसाइड नोट से यह साफ होता है कि वह नीट में फिर से बैठने को लेकर तनाव में थी, क्योंकि दोबारा परीक्षा देने पर पहले प्रयास जितने अच्छे अंक प्राप्त होने की उसे उम्मीद नहीं थी।
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग
वहीं जनपद पंचायत नईगढ़ी की अध्यक्ष ममता कुंज बिहारी तिवारी ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि समीक्षा जैसी प्रतिभाशाली बेटियां देश की अमूल्य धरोहर होती हैं। उनकी मौत केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की क्षति है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।







