श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- उमरिया। बांधवगढ़ सहित मध्यप्रदेश के सभी दूसरे टाइगर रिजर्वों में बाघों सहित अन्य वन्य प्राणियों की लगातार बढ़ती संख्या और बेहतर साइटिंग ने देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया है।
वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। यही वजह है कि कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना, पेंच, सतपुड़ा और संजय-धुबरी जैसे टाइगर रिजर्वों में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
लगातार बढ़ रहे पर्यटक
वन विभाग और पर्यटन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार, बेहतर सड़क और आवासीय सुविधाओं तथा वन्यजीव संरक्षण के सफल प्रयासों का सीधा असर पर्यटक आगमन पर दिखाई दे रहा है।इस वृद्धि में वन्यजीव पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना और पेंच जैसे रिजर्व विदेशी पर्यटकों के बीच भी विशेष रूप से लोकप्रिय बने हुए हैं।
इतनी हुई आय
पन्ना टाइगर रिजर्व इसका प्रमुख उदाहरण है। वर्ष 2024-25 के पर्यटन सत्र में यहां 2.75 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे और रिजर्व ने लगभग 7.42 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय अर्जित की। पिछले वर्ष की तुलना में यह आय काफी अधिक रही।
पन्ना को देश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल
अधिकारियों के अनुसार, बाघों की बढ़ती संख्या और नियमित साइटिंग ने पन्ना को देश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल कर दिया है। वन्यजीव पर्यटन पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, मध्य प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में पर्यटन से होने वाला कुल आर्थिक प्रभाव 166 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार, होटल व्यवसाय, गाइड सेवा, वाहन संचालन और अन्य पर्यटन गतिविधियों में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।
बेहतर सायटिंग ने किया आकर्षित
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बेहतर सायटिंग किसी भी टाइगर रिजर्व की सबसे बड़ी पहचान होती है। मध्यप्रदेश के कई रिजर्वों में पर्यटकों को सफारी के दौरान बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, बारहसिंगा और विभिन्न पक्षी प्रजातियों के दर्शन आसानी से हो रहे हैं। इसी कारण वन्यजीव फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ समिता राजौरा का कहना है कि संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखते हुए भविष्य में भी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। बढ़ती पर्यटक संख्या यह साबित करती है कि मध्यप्रदेश न केवल “टाइगर स्टेट” के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है, बल्कि वन्यजीव पर्यटन के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में भी तेजी से उभर रहा है।
बाघों की मौत कर रही है निराश
इस वर्ष मध्यप्रदेश में 30 बाघों की मौत अभी तक हो चुकी है। वर्ष 2026 में मध्यप्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्वों में बाघों की मौत के मामलों ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश, जिसे देश का “टाइगर स्टेट” कहा जाता है, में बाघों की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही प्राकृतिक कारणों, आपसी संघर्ष, बीमारी और अन्य घटनाओं के चलते बाघों की मौत के मामले भी सामने आए हैं।
कुछ मामलों की जांच अभी जारी है
वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में कई बाघों की मौत दर्ज की गई है। अधिकांश मामलों में बाघों की मृत्यु का कारण क्षेत्रीय संघर्ष, वृद्धावस्था, चोट या प्राकृतिक कारण बताए गए हैं, जबकि कुछ मामलों की जांच अभी जारी है।
बढ़ती संख्या के कारण प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बढ़ती संख्या के कारण उनके क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है, जिससे संघर्ष की घटनाएं सामने आती हैं। वन विभाग प्रत्येक मामले में पोस्टमार्टम और वैज्ञानिक जांच के माध्यम से मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रहा है।







