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Umaria News : खितौली की रानी तारा भीम और धमधमा फीमेल की बेटी है। इसका जन्म वर्ष 2015 में हुआ था।
उमरिया. 25may2024.09:43am. padma mishra.

उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व खितौली की रानी तारा ने चाैथी बार बच्चों को जन्म दिया है। शुरू में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई थी। यह संशय बना हुआ था कि जन्म लेने वाले तारा के बच्चों की संख्या तीन है अथवा चार। कुछ लोग तीन बता रहे थे जबकि कुछ लोगों का कहना है कि चार बच्चों ने जन्म लिया है। हालांकि तीन महीने बाद अब तारा अपने बच्चों को लेकर खुले जंगल में निकल आई है और यह साफ हो गया है कि उसके तीन बच्चे हैं, और अब वह अपने तीनों नए शावकों के साथ खुले जंगल में पर्यटकों को भी दिखाई देने लगी है। खितौली की रानी तारा भीम और धमधमा फीमेल की बेटी है। इसका जन्म वर्ष 2015 में हुआ था।
दरहा बच्ची ने भी जन्में शावक
इधर तारा अपने तीन महीने के शावकों के साथ जंगल में निकलकर सामने आई है और उधर दरहा बच्ची ने भी तीन शावकों को जन्म दे दिया है। जंगल में गश्त करने वाले लोगों ने यह जानकारी दी है कि दरहा बच्ची पिछले तीन दिनों से सामने नहीं आ रही है और इसकी वजह यह है कि उसने अपने बच्चों को जन्म दे दिया है। फिलहाल पार्क प्रबंधन के पास भी यह जानकारी इसलिए नहीं है क्योंकि छह से सात दिन पहले ही दरहा बच्ची ने बच्चों को जन्म दिया है और अभी वह उन्हें बाहर लेकर नहीं आई है। गुरूवार की सुबह दरहा बच्ची कुछ देर के लिए सामने आई तब उसका पेट कुछ हल्का नजर आ रहा था। दरहा बच्ची को कुछ सुरक्षा श्रमिकों ने इस दौरान देख लिया जिससे यह जानकारी सामने आई कि उसने अपने बच्चों को जन्म दे दिया है।
पर्यटकों को लुभा रहे शावक
तारा के तीनों शावक पर्यटकों को जमकर लुभा रहे हैं। तीन महीने से ज्यादा समय के बाद तारा भी पर्यटकों के लिए आकर्षक का कारण बन गई है। बताया जा रहा है कि जब तारा गर्भ से थी जिसकी वजह से उसका पेट फूला हुआ था और शरीर काफी भारी हो गया था। पिछले काफी समय से वह खितौली कोर और बफर के बीच बच्चों को जन्म देने के लिए सुरिक्षत स्थान की तलाश कर रही थी। सुरिक्षत स्थान की तलाश में तारा को तीन महीने से ज्यादा समय पहले खितौली बफर के पचपेढ़ी में देखा गया था। बफर और कोर के बीच उसकी तलाश लगातर तेज हो गई थी। लगभग तीन महीने पहले तारा ने पचपेढ़ी में एक स्थान तलाश लिया था और वह वहीं जम गई थी। इस स्थान के आसपास पानी भी पर्याप्त मात्रा में है और आसपास कोई बाघ भी नहीं है।
सुरक्षा पर ध्यान
बच्चों को जन्म देने के बाद बाघिनें अपने बच्चों को एकदम से बाहर लेकर नहीं आतीं। बच्चाें को बाहर लेकर आने में बाघिन कम से कम तीन महीने का समय लगाती हैं। हालांकि कभी कोई विशेष परिस्थिति होने पर बाघिनें जल्दी भी बच्चों को बाहर ले आती हैं लेकिन आमतौर पर ऐसा बहुत कम होता है। बच्चाें को जन्म देने के बाद बाघिन पहले से ज्यादा खुंखार हो जाती है और इसके पीछे वजह यह होती है कि उसे अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताती है। नए शावकों पर अक्सर बाघ हमला कर देते हैं और उन्हें खत्म करने का प्रयास करते हैं। इसकी वजह यह होती है कि बाघ को अपने वर्चस्व की चिंता होने लगती है। दूसरी वजह यह भी होती है कि जब तक शावक छोटे रहते हैं बाघिन बाघ के संसर्ग में नहीं आती।
महत्वपूर्ण हैं नए शावक
बाघों की चार वर्षीय गणना वर्ष 2026 में होगी। अगली गणना में बाघों की संख्या और बढ़े इसके लिए आवश्यक है कि नए जन्म लेने वाले शावक ज्यादा से ज्यादा सुरिक्षत रहें। गणना में एक साल से ज्यादा उम्र के शावकों को ही शामिल किया जाता है। इसकी वजह यह है शावकों की मृत्युदर 70 प्रतिशत के आसपास होती है। यानी जो शावक जन्म लेते हैं उनमें से महज 30 प्रशिशत ही विकसित हो पाते हैं। एक साल से कम उम्र के शावकों का जीवन खतरे में ही रहता है। एक साल से ज्यादा उम्र के शावक जवानी की दहलीज में पैर रख देते हैं और कठिन परिस्थितियों को झेलने लगते हैं।







