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नियमों को तोड़ रहे हैं हार्वेस्टर संचालक

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श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :-  उमरियाः फसल कटाई के लिए कृषि विभाग द्वारा बनाए गए नियमों का हार्वेस्टर संचालक खुलकर उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में करकेली जनपद के एक जनप्रतिनिधि ने शिकायत भी की है। बताया गया है कि करकेली जनपद के ग्राम कौड़िया में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। जनपद सदस्य एवं कृषि समिति के सभापति चंदन सिंह ने बताया कि गांव में एक हार्वेस्टर संचालक लाखा सिंह द्वारा बिना स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के कटाई की जा रही है।

इसकी लिखित शिकायत स्थानीय पटवारी और निगरानी समिति को दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि संबंधित पटवारी ने मामले को दबा दिया। जबकि नियमों का पालन कराने की जिम्मेदानी ही पटवारियों पर है।

यह है नियमः जिले में फसल कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई (फसल अवशेष) जलाने से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए शासन द्वारा सख्त नियम लागू किए गए हैं। इसके तहत किसानों और हार्वेस्टर संचालकोंको स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कटाई गहाई के दौरान स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा-रीपर मशीन का उपयोग अनिवार्य रूप से करें। हार्वेस्टर, संचालकों को कटाई से पहले कृषि विभाग में पंजीयन कराना अनिवार्य है। स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा-रीपर मशीन का उपयोग करना जरूरी है। फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में ही प्रबंधन करना चाहिए। कटाई के दौरान अग्नि सुरक्षा उपकरण, रेत औरं पानी की व्यवस्था रखना जरूरी है। खेतों के पास ट्रांसफार्मरों के आसपास 10 गुणा 10 फौट क्षेत्र खाली रखना अनिवार्य है।

लगाया गया है प्रतिबंधः  नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर ने प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किए हैं। इसके बावजूद जिले में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। हार्वेस्टर संचालक मनमानी ढंग से बिना आवश्यक उपकरणों के कटाई कर रहे हैं और प्रशासनिक निर्देशों का मखौल उड़ाया जा रहा है। आरोप है कि निचले स्तर पर कृषि एवं राजस्व अमले की मिलीभगत के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों का पालन नहीं हो रहा। शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह भी आरोप सामने आ रहे हैं कि कुछ शासकीय कर्मचारी नियमों को नजरअंदाज करने के एवज में हार्वेस्टर संचालकों से अवैध वसूली कर रहे हैं। यही कारण है कि अब तक किसी भी संचालक के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

होता है यह प्रभाव भीः विशेषज्ञों के अनुसार नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी की उर्वरता घटती है और पर्यावरण संतुलन पर गंभीर असर पड़ता है। स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम जैसी तकनीकें अवशेषों को बारीक काटकर खेत में ही मिला देती हैं, जिससे जलाने की जरूरत नहीं पड़ती और भूमि की गुणवत्ता भी बनी रहती है। इसके बावजूद जिले में नियमों की अनदेखी न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि पर्यावरण और आमजन के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।

 

Shreya News
Author: Shreya News

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