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इंदिरा गांधी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने जानी स्वाइल टेस्टिंग परीक्षण से ही पता चलती है मिट्टी की उर्वरता

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 श्रेया न्यूज़ नीलू राठौर shahdol :   शहडोलः मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में इंदिरा गांधी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं को मिट्टी का परीक्षण करना सिखाया गया और बताया गया कि मिट्टी का परीक्षण कराया जाना क्यों जरूरी है। परीक्षण से होने वाले फायदे भी बताए गए। मिट्टी के अंदर आर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटास, सल्फर, बोरान, जिंक, आयरन, मैंगनीज, कापर तत्वों के निकालने की विधि बताई गई। डा. प्रदीप कुमार राणा मृदा विशेषज्ञ प्रभारी एवं अभिलेश प्रताप सिंह लैब तकनीशियन द्वारा सूक्ष्म पोषक तत्व कैसे निकालते हैं इसकी जानकारी छात्राओं को प्रदान की गई।

छात्राओं द्वारा मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में जाकर व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया गया। इनको सब्जी मंडी स्थित कृषि उपज मंडी को मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में लैब टेक्नीशियन अभिलेश प्रताप सिंह ने यह समझाया कि किस तरह से खेतों से मिट्टी के नमूने लिए जाते हैं और फिर उनका परीक्षण किया जाता है। डा. प्रदीप राणा ने छात्राओं को मृदा में पाए जाने वाले पोषक तत्वों को जांचने की विधि एवं लैब में मिट्टी परीक्षण के तरीके सीखती कालेज की छात्राएं।

खेतों में उनके महत्व की जानकारी दी गई। इस दौरान छात्राओं ने मृदा परीक्षण को लेकर अपनी जिज्ञासाएं भी प्रकट कीं, जिनका समाधान किया गया। बताया कि मिट्टी परीक्षण से पता टेक्नीशियन अभिलेश प्रताप सिंह ने चलता है कि मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्व हैं और उनकी मात्रा क्या है l                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                परीक्षण के आधार पर किसान सही प्रकार और मात्रा में उर्वरक का उपयोग कर सकते हैं, जिससे फसल की उत्पादकता बढ़ती है। इससे पता चलता है कि कौन सी फसलें उस मिट्टी में अच्छी तरह से उगाई जा सकती हैं। इसके साथ ही इससे मिट्टी की सेहत का भी पता चलता है और उसके अनुसार सुधार के उपाय किए जा सकते हैं। परीक्षण से उर्वरकों का सही उपयोग करने में मदद मिलती है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव को आर्थिक लाभ होता है क्योंकि वे कम होता है। इसके साथ-साथ किसानों सही फसलें उगा सकते हैं और उर्वरकों सही उपयोग कर सकते हैं।

Shreya News
Author: Shreya News

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