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सोनोग्राफी में देरी, फिर मुश्किल से मिलता है गायनिक वार्ड में बेड

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श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :-   शहडोलः जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लगातार शासन-प्रशासन स्तर से दावे किए जाते है, लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। यदि किसी मरीज को अर्जेंट में जरूरी सोनोग्राफी कराना हो तो एक सप्ताह बाद नंबर लगता है, तब तक मरीज की बीमारी इतनी बढ़ जाती है कि उसका बचना मुश्किल हो जाता है। उपचार की सुविधाओं में लापरवाही के साथ शुद्ध पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है। पानी टंकियों की नियमित सफाई नहीं होती है। इतना ही नहीं सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं बने हैं। अस्पतालों का संक्रमण युक्त गंदा पानी सीधे नालियों में बहाया जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में भवन बने है, लेकिन अधिकांश बिना डाक्टर के चल रहे हैं। कई जगह बेड व अन्य सुविधाओं की कमी है।

संभागीय मुख्यालय के जिला अस्पताल का भी हाल-बेहाल है। यहां गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से विभाग बना दिया है, लेकिन यहां पर्याप्त बेड सहित अन्य जरूरी सुविधाओं की हमेशा कमी बनी रहती है। जिला अस्पताल में 300 बेड की सुविधाएं हैं, जो कम पड़ रही है। आए दिन मरीजों बेडू नहीं मिल पाते है। यहां के गायनिक वार्ड में सबसे अधिक मरीजों की भर्ती होती है, लेकिन आसानी से बेड उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। यहां हमेशा मरीजों का दबाव बना रहता है। ऐसी स्थिति में मरीजों को जमीन पर लेटकर उपचार लेना पड़ता है। जिला अस्पताल में गायनिक डिपार्टमेंट के ठीक बगल से नई इमारत बनाई जा रही है, लेकिन इसका काम भी धीमा चल रहा है। दिसंबर 2024 में यहां की इमारत का काम पूरा होना था, लेकिन अभी तक अधूरा है। उल्लेखनीय की यहां की इमारत बन जाने के बाद मरीज भर्ती करने के बाद आसानी से बिस्तर मिल जाएंगे। नई बिल्डिंग में 40 बेड की मैटरनिटी रहेगी और यहीं पर बच्चों के लिए भी वार्ड तैयार होगा।

धूल खा रही है टोकन मशीनः जिला अस्पताल में मरीजों को समय पर समुचित इलाज मिले इसके लिए टोकन मशीन की व्यवस्था की गई थी, लेकिन यह मशीन भी खराब है और धूल खा रही है। सोनोग्राफी में भी होती लेट लतीफी होती है। जिला अस्पताल में सोनोग्राफी के लिए मरीजों को लंबी लाइन लगानी पड़ती है। एक हफ्ते से अधिकं समय की प्रतीक्षा के बाद नंबर लगता है। जिला अस्पताल में एक ही सोनोग्राफी संचालित हो रही है और एक डाक्टर के भरोसे ही यह सेवा चल रही है। एक दिन में 30 से 40 मरीजों की ही सोनोग्राफी हो पाती है, जबकि यहां हर दिन 100 से अधिक मरीजों को सोनोग्राफी करने की जरूरत है। जिला अस्पताल में विशेषज्ञों के अनेक पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण अव्यवस्था हो रही है।

सुविधाओं को नियमित बेहतर बनाने के प्रयास हो रहे हैं। कहीं कमी है तो ठीक करेंगे । गायनिक वार्ड में समस्या हो सकती है, लेकिन नए भवन बनने के बाद ठीक हो जाएगा । भवन बन रहा है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के पत्राचार किया गया है। जरुरी सुविधाओं को ठीक करने निरंतर प्रयास हो रहे है।

डा शिल्पी शराफ सिविल सर्जन जिला

अस्पताल शहडोल।

Shreya News
Author: Shreya News

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