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एएसबीसी एशियन अंडर-22 बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले ध्रुव की कहानी, उनकी जुबानी
ग्वालियर•May 13, 2024 / 02:14 pm•padma mishra

ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना सपना
ध्रुव कहते हैं कि पढ़ाई के साथ बॉक्सिंग की पूरी तैयारी जारी है। एलएनआइपीई का अंतिम वर्ष है, उसके बाद बॉक्सिंग की कोचिंग लेकर ओलंपिक में खेलने की तैयारी के लिए जुटना है। अभी शनिवार-रविवार संस्थान से बाहर जाकर तैयारी करता हूं। इसके अलावा संस्थान के कुछ बॉक्सरों के साथ भी प्रैक्टिस करता हूं। खुद पर भरोसा है कि एक न एक दिन भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर जरूर लाऊंगा।
न कोच न पार्टनर, बस पंचिंग बैग ही सहारा
ध्रुव बताते हैं कि वह पापा से कोचिंग लेते हैं। समय-समय पर रेलवे और अन्य कोच से ट्रेनिंग लेते हैं, लेकिन कोई परमानेंट कोच नहीं है। कजाकिस्तान जाने से पहले पार्टनर बॉक्सर के पैर में चोट लग गई थी, इसलिए प्रैक्टिस करने में काफी परेशानी हुई। पिता टिप्स देते थे और पचिंग बैग पर प्रैटिक्स करता था। ध्रुव कहते हैं कि यदि सालभर कोई कोच साथ होता तो शायद पहली बार में ही गोल्ड जीतकर आता।
पिता बॉक्सर थे, स्वर्ण पदक जीता
ध्रुव ने बताया, पिता धीरेन्द्र सिंह बॉक्सर थे। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन उन्हें जिंदगीभर अफसोस रहा कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं खेल सके। उनका जुनून था मेरे बेटे देश के लिए खेलें। इसलिए बचपन से मुझे और मेरे बड़े भाई को बॉक्सिंग ग्लब्स पहना दिए थे।







